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चीन की कूटनीति ने ईरान-अमेरिका युद्धविराम में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

चीन ने ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विदेश मंत्री वांग यी ने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ 26 बार बातचीत की, जिससे तनाव कम करने में मदद मिली। अमेरिका द्वारा दिए गए कड़े अल्टीमेटम के बीच, चीन की सक्रिय कूटनीति ने स्थिति को बदल दिया। जानें इस कूटनीतिक प्रयास के पीछे के कारण और चीन के रणनीतिक हित।
 

चीन की कूटनीतिक पहल

बीजिंग/तेहरान : चीन ने ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम को लागू कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का खुलासा किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के लिए व्यापक कूटनीतिक प्रयास किए गए थे।


चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बताया कि युद्धविराम को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ 26 बार फोन पर बातचीत की। यह संकेत करता है कि इस प्रक्रिया में कई देशों की भागीदारी रही, जबकि पाकिस्तान की भूमिका सीमित रही।


रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम चरण में चीन ने तेहरान पर कूटनीतिक दबाव डाला, जिसके परिणामस्वरूप ईरान बातचीत के लिए सहमत हुआ और तनाव कम करने पर राजी हुआ। इससे पहले स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को कड़ा अल्टीमेटम दिया था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि यदि यह मार्ग बाधित हुआ तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस दौरान क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ गई थीं, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ी थी।


तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के अलावा तुर्की, मिस्र और कतर जैसे देशों ने भी मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन प्रारंभिक दौर में बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।


इसके बाद, चीन की सक्रिय कूटनीति निर्णायक साबित हुई। वांग यी ने ईरान, इजरायल, रूस और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और अंततः ईरान को युद्धविराम के लिए राजी किया।


विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस पहल के पीछे उसके रणनीतिक और आर्थिक हित भी जुड़े हुए हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता उसकी ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। इसके साथ ही, इस पहल के माध्यम से चीन ने खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जो कूटनीति के जरिए अंतरराष्ट्रीय संकटों को सुलझाने में सक्षम है।