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चीन में पालतू जानवरों के अंतिम संस्कार का बढ़ता उद्योग

चीन में पालतू जानवरों के प्रति लोगों की सोच में बदलाव ने एक नए उद्योग को जन्म दिया है। अब लोग अपने प्यारे जानवरों को सम्मानपूर्वक विदाई दे रहे हैं। इस उद्योग में महंगे पैकेज और इंसानों जैसी विदाई की प्रक्रिया शामिल है। हालांकि, इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में नियमों की कमी और धोखाधड़ी की आशंका भी बढ़ रही है। जानें इस उद्योग के बारे में और क्या हैं इसकी चुनौतियाँ।
 

बीजिंग में पालतू जानवरों के प्रति बदलती सोच

बीजिंग: चीन में पालतू जानवरों के प्रति लोगों की भावनाओं में आए बदलाव ने एक नया और विशाल उद्योग विकसित किया है। अब लोग अपने प्यारे कुत्ते या बिल्ली की मृत्यु के बाद उन्हें कचरे की तरह फेंकने के बजाय, उन्हें परिवार के सदस्य की तरह सम्मानपूर्वक विदाई दे रहे हैं। इस सोच के चलते चीन में 'पेट फ्यूनरल इंडस्ट्री' तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, इस क्षेत्र में सरकारी निगरानी, स्पष्ट लाइसेंसिंग और पर्यावरण से जुड़े नियमों की कमी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है।


इंसानों जैसी विदाई की प्रक्रिया

चीन के बड़े शहरों में पालतू जानवरों को विदा करने का तरीका अब इंसानों के अंतिम संस्कार के समान हो गया है। डालियान और शंघाई जैसे शहरों में पेट फ्यूनरल सेंटर्स पर फूलों से सजे कमरे, अंतिम दर्शन की व्यवस्था, पंजों के निशान और फोटो को यादगार फ्रेम में सहेजने जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। कई कंपनियां इसके लिए महंगे और लग्जरी पैकेज भी पेश कर रही हैं। लगभग 1,500 अमेरिकी डॉलर (करीब 1.25 से 1.30 लाख भारतीय रुपये) वाले हाई-एंड पैकेज में जानवर के शव को आलीशान लिमोजिन में ले जाया जाता है, और चार वर्दीधारी कर्मी पूरे प्रोटोकॉल के साथ अंतिम यात्रा निकालते हैं।


भावनात्मक संबंधों का प्रभाव

इन सेवाओं की बढ़ती मांग के पीछे इंसान और जानवरों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता है। 2026 में 504 शहरी पालतू मालिकों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि लोग अब पालतू जानवरों को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं। जब वे अपने वफादार साथी को खोते हैं, तो यह उनके लिए केवल शव के निपटान का मामला नहीं होता, बल्कि एक भावुक विदाई का अवसर बन जाता है। यही कारण है कि लोग लाखों रुपये खर्च करने के लिए तैयार हैं।


नियमों की कमी और धोखाधड़ी की आशंका

जैसे-जैसे यह उद्योग अरबों रुपये का बनता जा रहा है, इससे जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। चीन में इस क्षेत्र के लिए कोई सख्त केंद्रीय दिशानिर्देश या नियामक व्यवस्था नहीं है। ग्राहकों के मन में अक्सर यह संदेह रहता है कि क्या उन्हें वास्तव में उनके जानवर की राख लौटाई जा रही है। इसके अलावा, बिना लाइसेंस वाली संस्थाएं, मनमाने दाम और पर्यावरणीय मानकों का अभाव गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों की भावनाओं की रक्षा के लिए सरकार को तुरंत पारदर्शी नियम और सख्त नीतियां लागू करनी चाहिए।