चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्ष से मिलने से किया इनकार, पत्र में स्पष्ट किया कारण
चीफ जस्टिस का पत्र और विपक्ष की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। विपक्ष की ओर से मिलने का समय मांगने के लिए भेजी गई चिट्ठी का जवाब देते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक पत्र लिखा है, जिसे कांग्रेस पार्टी ने सार्वजनिक किया है। हालांकि, सुबह में उन्होंने इस पत्र के विषय में जानकारी देने से मना कर दिया था और पत्रकारों को सलाह दी कि उन्हें विपक्ष से पूछना चाहिए। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित मामले अदालत में विचाराधीन हैं, इसलिए विपक्षी नेताओं से मिलना उचित नहीं होगा।
चीफ जस्टिस ने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह उनका विषय नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा सभी के लिए खुला है और कोई भी नागरिक या निर्वाचित प्रतिनिधि याचिका दायर कर सकता है। विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान उन्होंने मीडिया के कुछ सवालों का उत्तर दिया।
इस बीच, उनकी वह चिट्ठी भी सामने आई है, जिसमें उन्होंने रविवार को 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं से मिलने से मना किया था। पत्र में उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में इन पर बैठक करना न्यायिक मर्यादा और नैतिकता के खिलाफ होगा। उन्होंने यह भी लिखा कि सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
चीफ जस्टिस ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के तहत सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सोमवार को याचिका दायर करता है, तो उसे मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और नागरिक किसी भी समय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।