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चुनाव आयोग की चौंकाने वाली चुप्पी: बशीरहाट सीट पर उपचुनाव की अनदेखी

चुनाव आयोग ने असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की है, जबकि बशीरहाट सीट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह स्थिति कई सवाल उठाती है, खासकर जब बशीरहाट सीट पर मुस्लिम आबादी का प्रतिशत अधिक है। जानें कि क्यों भाजपा इस सीट पर चुनाव नहीं चाहती और चुनाव आयोग की चुप्पी के पीछे क्या कारण हो सकते हैं।
 

चुनाव आयोग का निर्णय विवादास्पद


चुनाव आयोग ने असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव कराने का निर्णय लिया है, जबकि पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट पर उपचुनाव की कोई घोषणा नहीं की गई है। यह स्थिति हैरान करने वाली है, क्योंकि नौगांव सीट चार मई को विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद खाली हुई, जबकि बशीरहाट सीट नवंबर 2024 से रिक्त है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बशीरहाट सीट पर कोई विवाद नहीं है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के नुरूल इस्लाम ने जून 2024 में चुनाव जीता था, लेकिन उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई।


चुनाव आयोग की इस चुप्पी के पीछे कई अज्ञात कारण माने जा रहे हैं। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि बशीरहाट सीट पर उपचुनाव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के साथ होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब, चार मई के बाद खाली हुई दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, फिर भी बशीरहाट सीट पर चुनाव नहीं कराया जा रहा है।


यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि चुनाव आयोग नियमों के अनुसार नहीं, बल्कि भाजपा की आवश्यकताओं के अनुसार कार्य कर रहा है। बशीरहाट सीट पर मुस्लिम आबादी का प्रतिशत 50 से अधिक है, और यदि उपचुनाव होता है, तो भाजपा की हार निश्चित है। भाजपा नहीं चाहती कि विपक्ष की ताकत बढ़े, खासकर जब लोकसभा में उसके पास 240 सीटें हैं, जो कि बहुमत के लिए पर्याप्त नहीं हैं।


आंकड़ों के अनुसार, 2024 में बशीरहाट सीट पर तृणमूल के नुरूल इस्लाम को आठ लाख से अधिक वोट मिले थे, जबकि भाजपा के रेखा पात्रा को चार लाख 30 हजार वोट मिले थे। नुरूल इस्लाम ने तीन लाख 33 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। यह जीत तब हुई जब विपक्ष का वोट तीन हिस्सों में बंटा था। ऐसे में भाजपा क्यों चाहती कि चुनाव हो?