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चुनाव आयोग ने 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे, स्थायी रूप से शिफ्ट होने का सवाल

चुनाव आयोग ने हाल ही में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया में 'परमानेंटली शिफ्टेड' श्रेणी में सबसे अधिक नाम कट रहे हैं। दिल्ली और तेलंगाना में बड़ी संख्या में मतदाता स्थायी रूप से शिफ्ट होने के कारण सूची से बाहर हो गए हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और सवाल उठाती है कि ये लोग कहां जा रहे हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

मतदाता सूची में बड़े बदलाव


चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस पर एक लेख में कहा है कि यह जनसंख्या को कम करने का एक प्रभावी तरीका है। अरविंद केजरीवाल ने इस पर व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार को जनगणना की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि चुनाव आयोग खुद ही 140 करोड़ की जनसंख्या को 50 करोड़ में बदल देगा। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने की बात चिंताजनक है, खासकर जब यह देखा जाए कि सबसे अधिक नाम 'परमानेंटली शिफ्टेड' श्रेणी में कट रहे हैं।


हाल ही में चुनाव आयोग ने दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची जारी की, जिसमें स्थायी रूप से शिफ्ट होने वाले 66 प्रतिशत नाम शामिल हैं। दिल्ली में कुल 47 लाख नाम कटे हैं, जिनमें से 30 लाख से अधिक नाम स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर चले जाने के कारण हटाए गए हैं। इसके पहले तेलंगाना की मसौदा सूची में 71 लाख नाम कटे, जिनमें से 43 लाख स्थायी रूप से शिफ्ट होने वाले थे। यदि पूरे देश की बात करें, तो लगभग 50 प्रतिशत नाम इसी श्रेणी में कट रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि ये लोग आखिर कहां जा रहे हैं?


पिछले साल जून में बिहार में एसआईआर की शुरुआत के दौरान 65 लाख नाम कटे थे, जिनमें से 36 लाख नाम विस्थापित होने के कारण हटाए गए थे। तब माना गया कि ये लोग काम के सिलसिले में बड़े शहरों जैसे दिल्ली, कोलकाता, मुंबई या सूरत में चले गए होंगे। लेकिन अब दिल्ली में 30 लाख और तेलंगाना में 43 लाख नाम स्थायी रूप से शिफ्ट होने के कारण कट गए हैं, तो यह सवाल उठता है कि ये लोग कहां जा रहे हैं? ध्यान रहे कि स्थायी रूप से शिफ्ट होने वालों के अलावा डुप्लीकेट वोटर्स की एक अलग श्रेणी है। चुनाव आयोग का ऐप ऐसे लोगों को पहचान रहा है, जिनके नाम दो स्थानों पर हैं और एक स्थान से नाम हटा रहा है।


इसके अलावा, एब्सेंट यानी पते पर नहीं मिलने वाले मतदाताओं की श्रेणी भी अलग है, जिसमें भी नाम कट रहे हैं। इस स्थिति में यह बड़ा सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग शिफ्ट हो रहे हैं, तो वे कहां जा रहे हैं? सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। एक राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी परमानेंटली शिफ्ट के आधार पर काटा गया है।