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चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से किया इनकार

चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान उपयोग किए गए वोटर लिस्ट सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह जानकारी कॉमर्शियल प्राइवेसी से संबंधित है। RTI के तहत पूछे गए सवालों में सॉफ्टवेयर का नाम, वर्जन और AI के उपयोग के बारे में जानकारी मांगी गई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि ERO ही मतदाता सूची तैयार करने का जिम्मेदार अधिकारी है। इस प्रक्रिया में 13 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं, जिससे आयोग पर दबाव बढ़ रहा है।
 

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग (ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान उपयोग किए गए वोटर लिस्ट सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से मना कर दिया है। आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि यह जानकारी कॉमर्शियल प्राइवेसी और इंटेलेक्चुअल राइट्स से संबंधित है, इसलिए यह RTI कानून के दायरे में नहीं आती।


SIR के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग

आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं बनाया गया और न ही खरीदा गया। मतदाता को सूची में शामिल करने या हटाने का निर्णय संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर लिया जाता है। आयोग ने यह जानकारी 16 अक्टूबर को दी।


RTI में पूछे गए सवाल

यह RTI तेलंगाना के करीमनगर के सामाजिक कार्यकर्ता एमए मुजीब अय्यूब द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने वोटर डेटा में गलतियों को पकड़ने के लिए उपयोग किए गए सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन या AI प्लेटफॉर्म का नाम और वर्जन मांगा था। इसके अलावा, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सिस्टम अपने आप रिकॉर्ड को जांचता है और सुधार या हटाने के लिए चिह्नित करता है।


चुनाव आयोग का उत्तर

अय्यूब के पहले सवाल पर आयोग ने आरटीआई कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए जानकारी देने से मना कर दिया, जो व्यापारिक गोपनीयता से संबंधित है। ऑटोमैटिक पहचान और AI के उपयोग के सवालों पर आयोग ने कहा कि यह कोई दस्तावेजी जानकारी नहीं है, बल्कि सफाई मांगी जा रही है, जो आरटीआई कानून के तहत नहीं आती।


चुनाव आयोग की अन्य जानकारी

चिह्नित मामलों की समीक्षा के सवाल पर आयोग ने धारा 8(1)(g) का उल्लेख किया, जो ऐसी जानकारी को छूट देती है, जिसके खुलासे से किसी की जान या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13B(1) और 13B(2) का भी हवाला दिया, जिसके अनुसार संबंधित विधानसभा क्षेत्र का ERO मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने का वैधानिक प्राधिकारी है।


SIR पर उठते सवाल

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर पहले से ही दबाव है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में देश की मतदाता सूचियों से 13 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। एक अन्य पड़ताल में कहा गया कि चुनाव आयुक्तों ने कई बार लिखित असहमति और आपत्तियां दर्ज की हैं। आयोग ने कहा कि असहमतियां विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं।