चुनाव आयोग में मतदाता सूची विवाद: राहुल गांधी और अन्य नेताओं के आरोप
नई दिल्ली में चुनाव आयोग का विवाद
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवाद ने बुधवार को राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया। आयोग ने इस मामले में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सदस्यों द्वारा लिखित टिप्पणियां और सुझाव देना एक सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR सहित सभी महत्वपूर्ण निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
विवाद की शुरुआत
यह विवाद तब शुरू हुआ जब द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई निर्णयों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की हैं। इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। हालांकि, आयोग ने कहा कि इन टिप्पणियों को औपचारिक असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
आयोग ने कहा कि किसी भी निर्णय के अंतिम रूप लेने से पहले सदस्य सवाल उठा सकते हैं और सुझाव दे सकते हैं। ये टिप्पणियां प्रक्रिया को सुधारने और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के लिए होती हैं। आयोग ने पिछले एक साल में 40 नई पहलों और कई चुनावी सुधारों का भी उल्लेख किया।
राहुल गांधी के आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए 'वोट चोरी' को भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध बताया। उन्होंने इसे संविधान पर हमला करार दिया और भाजपा, आरएसएस तथा चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
खड़गे और अखिलेश का बयान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से मामले का स्वत: संज्ञान लेने की मांग की।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी SIR को रद्द करने की मांग की। विपक्षी नेताओं के आरोपों का चुनाव आयोग ने खंडन किया है।