चैती छठ पूजा: बिहार में आस्था का महापर्व शुरू
चैती छठ का आगाज़
नई दिल्ली। बिहार में लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व चैती छठ का आरंभ रविवार को नहाय-खाय से हुआ। सभी छठ व्रती सुबह से ही नदी या तालाब में स्नान कर कद्दू, चावल और चने की दाल का प्रसाद बनाने में जुट गई हैं। उन्होंने इसे बनाकर ग्रहण करते हुए भगवान सूर्य की आराधना की। पटना से लेकर बिहार के हर गांव में छठ का माहौल छा गया है। राज्य के सभी जिलों में छठ घाटों पर पूजा की प्रशासनिक तैयारियाँ चल रही हैं।
सुरक्षा और तैयारी
इन दिनों घाटों पर सुरक्षा, सफाई और रंग रोगन की तैयारियाँ चल रही हैं। पटना की निवासी आरती सिंह ने बताया कि नहाय-खाय के दिन चावल, कद्दू की सब्जी और चने की दाल बनाने की परंपरा है। पारंपरिक गीतों के साथ सभी ने प्रसाद ग्रहण किया और अब वे खरना की तैयारी में जुट गई हैं। आरती ने कहा, "हम सभी गंगा जी आए हैं। आज नहाए-खाए हैं और कद्दू-चावल का प्रसाद बना रहे हैं। कल सोमवार को खरना का प्रसाद बनेगा। इसके बाद डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगे और अगली सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन होगा।"
छठी मईया की पूजा
सूर्य देव की बहन की होती है पूजा
भगवान सूर्य देव की बहन छठी मईया की पूजा इस पर्व में की जाती है। मान्यता है कि छठी मईया की आराधना करने से हर छठवर्ती की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। छठ व्रती ने बताया कि संतान सुख की प्राप्ति और पूरे परिवार की सुख, समृद्धि और शांति के लिए छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। यह पर्व हिंदुओं के लिए नियम निष्ठा का प्रतीक है, क्योंकि खरना के दिन प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।