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चौमूं में सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन का बुलडोजर एक्शन

राजस्थान के चौमूं कस्बे में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उपद्रवियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू किया गया है, जिसमें अवैध निर्माणों और बूचड़खानों को ध्वस्त किया गया है। प्रशासन ने 24 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें से कई को हिरासत में लिया गया है। जानें इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी और प्रशासन की कार्रवाई के पीछे की वजह।
 

चौमूं में प्रशासन की सख्ती

जयपुर/चौमूं: हाल ही में राजस्थान के जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में हुई सांप्रदायिक हिंसा और पुलिस पर पथराव के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। एक सप्ताह बाद, प्रशासन ने उपद्रवियों के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' शुरू कर दिया है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर परिषद की टीम ने अवैध निर्माणों और बूचड़खानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की है।


नोटिस की अवधि समाप्त, कार्रवाई का आरंभ

प्रशासन ने हिंसा और पत्थरबाजी में शामिल 24 आरोपियों के घरों पर नोटिस चस्पा किए थे। इन नोटिसों में अवैध निर्माण के संबंध में स्पष्टीकरण और कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया था, जो 31 दिसंबर को समाप्त हो गया।


आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

आरोपियों की ओर से संतोषजनक जवाब या दस्तावेज न मिलने पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी। चौमूं की पठान कॉलोनी में बुलडोजर की मदद से 20 अवैध बूचड़खाने और 4 अन्य अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।


पुलिस की कार्रवाई का विवरण

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिंसा के मामले में अब तक लगभग 110 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से 19 को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ के दौरान 15 अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं, जो अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।


घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण

विवाद की शुरुआत चौमूं में एक मस्जिद के बाहर रेलिंग लगाने को लेकर हुई थी। पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच पहले पत्थर हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन जैसे ही पत्थर हटाए गए, कुछ लोगों ने वहां रेलिंग लगानी शुरू कर दी। जब पुलिस ने इसे रोका, तो समुदाय विशेष की भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया।


इस हिंसक झड़प में 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए थे कि पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और कस्बे में इंटरनेट सेवाएं भी बंद करनी पड़ी थीं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन अवैध गतिविधियों पर लगातार प्रहार कर रहा है।