छत्तीसगढ़ में तेंदुए को पकड़ने में ग्रामीणों की बहादुरी, पिता ने बचाई बेटी
धमतरी में तेंदुए का आतंक समाप्त
नई दिल्ली - छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में तीन दिनों से तेंदुए के आतंक का सामना कर रहे ग्रामीणों ने आखिरकार उसे पकड़ लिया। शुक्रवार सुबह आमानारा गांव में तेंदुए ने तीन साल की बच्ची सुहानी मरकाम पर हमला किया। इस दौरान उसके पिता सुरेश मरकाम ने अपनी जान की परवाह किए बिना तेंदुए को पीछे से पकड़ लिया। इसके बाद अन्य ग्रामीणों ने लाठी और रस्सियों की मदद से तेंदुए को काबू कर लिया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आगे की कार्रवाई की। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद आसपास के गांवों में राहत की लहर दौड़ गई।
पिता ने साहस दिखाते हुए तेंदुए से भिड़े
यह घटना 16 अक्टूबर की सुबह लगभग 7:30 बजे हुई। तेंदुआ गांव में घुसकर पहले तीन ग्रामीणों पर हमला कर चुका था। इसी दौरान उसने सुरेश मरकाम की बेटी सुहानी को निशाना बनाया। पिता ने साहस दिखाते हुए तेंदुए को पीछे से पकड़ लिया और उसके पिछले पैर को जकड़ लिया। इसके बाद अन्य ग्रामीण लाठी और रस्सियों के साथ पहुंचे और मिलकर तेंदुए को बांध दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचित किया और टीम के पहुंचने तक तेंदुए को काबू में रखा।
हमलों से क्षेत्र में दहशत
तेंदुए के हमलों से इलाके में दहशत फैल गई थी। वन विभाग के अनुसार, हमलों में 12 लोग घायल हुए, जिनमें से दो की मौत हो गई। मृतकों में 25 वर्षीय रामशिला मांडवी शामिल थीं, जो गर्भवती थीं। दूसरे मृतक प्रभु लाल मंडावी बताए गए हैं। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि हमलों में 19 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
पिंजरे और थर्मल ड्रोन से नहीं मिला था सुराग
सीतानदी टाइगर रिजर्व के डीएफओ वरुण जैन ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पिंजरे लगाए थे और थर्मल ड्रोन कैमरों का उपयोग किया गया था, लेकिन तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। अंततः ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया।
रेबीज की आशंका और सम्मान की योजना
तेंदुए में रेबीज होने की आशंका जताई गई है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग घायलों की सूची तैयार कर रहा है और उनके उपचार में मदद करेगा। डीएफओ वरुण जैन ने कहा कि तेंदुए को पकड़ने में साहस दिखाने वाले ग्रामीणों को सम्मानित किया जाएगा। हालांकि, हमलों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह घटना गहरा दुख छोड़ गई है।