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छत्तीसगढ़ में नक्सली चैतू ने किया आत्मसमर्पण, 10 अन्य माओवादी भी शामिल

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने आत्मसमर्पण कर दिया है। उसके साथ 9 अन्य माओवादी भी हथियार डालने के लिए आगे आए हैं। चैतू को 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का मुख्य योजनाकार माना जाता है। पुलिस का कहना है कि लगातार एंटी-नक्सल ऑपरेशन और पुनर्वास नीति के कारण नक्सलियों का मनोबल टूटा है। जानें इस आत्मसमर्पण के पीछे की कहानी और बस्तर में शांति की दिशा में उठाए गए कदम।
 

नक्सली चैतू का आत्मसमर्पण

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सक्रिय 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने शुक्रवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। चैतू दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था और उसके ऊपर 25 लाख रुपए का इनाम था। उसके साथ 9 अन्य माओवादी भी हथियार डालने के लिए आगे आए। इन सभी पर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था।


झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड

चैतू को 2013 में झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले का मुख्य योजनाकार माना जाता है, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई प्रमुख नेता मारे गए थे। वह लंबे समय तक दरभा डिवीजन का प्रभारी भी रहा। आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सलियों में सरोज उर्फ डीसीवीएम शामिल है, जिस पर आठ लाख रुपए का इनाम था। बाकी आठ नक्सली एरिया कमेटी के सदस्य हैं, जिनमें भूपेश उर्फ सहायक राम, प्रकाश, कमलेश उर्फ झिटरू, जननी उर्फ रयमती कश्यप, संतोष उर्फ सन्नू, नवीन, रमशीला और जयती कश्यप शामिल हैं।


पुलिस की कार्रवाई और पुनर्वास नीति

पुलिस का कहना है कि जवानों के निरंतर एंटी-नक्सल ऑपरेशन, बड़े माओवादी नेताओं का आत्मसमर्पण और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति ने इन नक्सलियों को प्रभावित किया। पिछले कुछ महीनों में कई वरिष्ठ नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे संगठन का मनोबल टूटा है।


सरेंडर के बाद की प्रक्रिया

सभी नक्सलियों ने पुलिस को रायफल, पिस्तौल, विस्फोटक और गोला-बारूद सौंप दिए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की सरेंडर नीति के तहत इन सभी को सुरक्षा, रहने की व्यवस्था और आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।


बस्तर में शांति की दिशा में कदम

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि चैतू जैसे हार्डकोर नक्सली का आत्मसमर्पण बस्तर में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता है। इस वर्ष अब तक 150 से अधिक नक्सली या तो मारे जा चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आने वाले दिनों में और नक्सलियों के हथियार डालने की संभावना है, जिससे बस्तर में शांति की राह साफ होती दिख रही है।