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छत्तीसगढ़ में माओवादी हमले के दोषियों को मिली मृत्युदंड की सजा

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एनआईए की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे, जिनमें से 27 लोगों की जान गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पर विचार किया। बचाव पक्ष ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का इरादा जताया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की कहानी।
 

बस्तर में माओवादी हमले का फैसला


छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में, एनआईए की विशेष अदालत ने 2013 में हुए झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस हमले में कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की जान गई थी।


विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने 5 सितंबर को दो महिलाओं सहित 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था, और सजा का फैसला 16 सितंबर के लिए सुरक्षित रखा गया था। बुधवार को अदालत ने सभी दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।


एनआईए के वकील दिनेश पानिग्रही ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों से जिरह की और कई दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। प्रारंभिक रिपोर्ट में कई ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था। कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई।


बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देने का इरादा रखते हैं। एनआईए के अनुसार, अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता, हथियार कानून, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया।


यह मामला 25 मई, 2013 का है, जब छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' पर माओवादियों ने हमला किया।


एनआईए के अनुसार, माओवादियों ने पहले बारूदी सुरंग में विस्फोट किया और फिर अंधाधुंध गोलीबारी तथा बमों से हमला किया। इस हमले में 24 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 35 से अधिक लोग घायल हुए। बाद में तीन घायलों की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या 27 हो गई।


एजेंसी के मुताबिक, हमलावरों ने पीड़ितों के हथियार, गोला-बारूद, वॉकी-टॉकी सेट, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी लूट लिए थे।


इस हमले में मारे गए लोगों में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल और कांग्रेस नेता एवं विधायक उदय मुदलियार शामिल थे।