छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दुष्कर्म के आरोपी को बरी किया गया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें आरोपी को बरी कर दिया गया है। अदालत ने कहा कि पीड़िता अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और उनके बीच शारीरिक संबंध बने थे। इस प्रकार, आपसी सहमति से बने संबंध को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसके साथ ही, आरोपी को एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोपों से भी मुक्त कर दिया गया है।
14 जनवरी 2022 को गारियाबंद जिले के इंदागांव थाने में एक युवती ने एक युवक के खिलाफ दुष्कर्म, अपहरण और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था। युवती ने आरोप लगाया था कि 11 जनवरी को आरोपी ने उसे मोटरसाइकिल पर ले जाकर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया। पुलिस द्वारा कराई गई मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर कोई चोट नहीं पाई गई और मेडिकल रिपोर्ट ने भी दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की। पीड़िता ने डॉक्टर के सामने जबरदस्ती संबंध बनाने से इनकार किया। अदालत में भी उसने कहा कि परिजनों के दबाव में आकर उसने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए थे।
विशेष न्यायाधीश ने आरोपी धर्मेंद्र कुमार को अपहरण, दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है जब वह पूरी तरह से अवैध या असंगत हो। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपहरण या दुष्कर्म के आरोपों को साबित करने में असफल रहा। मुख्य अपराध सिद्ध न होने के कारण एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान भी लागू नहीं होते। इन आधारों पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा।