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छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी हलचल तेज

छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। राहुल गांधी के बाद, अभिजीत दिपके ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। दिपके का कहना है कि छात्रों पर लाठीचार्ज बिना उच्च स्तर के आदेश के संभव नहीं था। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय करने की बात की है। दूसरी ओर, BJP ने इन आरोपों को निराधार बताया है। जानें इस विवाद के सभी पहलुओं के बारे में।
 

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। दिपके का कहना है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई बिना उच्च स्तर के आदेश के संभव नहीं थी।


दिपके का बयान

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दिपके ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय करते हुए अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए।


शांतिपूर्ण प्रदर्शन का महत्व

दिपके ने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन को जिस तरह रोका गया, उससे कई सवाल उठते हैं। उनका मानना है कि इतनी बड़ी पुलिस कार्रवाई बिना उच्च स्तर के निर्देश के नहीं हो सकती। इसलिए, उन्होंने गृह मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।


विदेशी फंडिंग के आरोपों का खंडन

दिपके ने अपनी पार्टी पर लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्रालय की निगरानी में उनकी पार्टी को विदेशी फंड मिल रहा है, तो यह सरकार की विफलता है। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके परिवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के लिए धमकियां दी गईं।


BJP का जवाब

BJP नेता केशव उपाध्ये ने दिपके के सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यदि दिपके राहुल गांधी की राजनीति करना चाहते हैं, तो उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए। उपाध्ये ने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों की मांगों पर कार्रवाई करते हुए पेपल लीक के खिलाफ कानून बनाया और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी स्वीकार किया। इसके बावजूद विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है।