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जंतर मंतर पर प्रदर्शन हिंसा की जांच में कमी, सुप्रीम कोर्ट ने दी जानकारी

जंतर मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच कर रही समिति को सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि शिकायतों की संख्या बहुत कम है। 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के बाद से अब तक केवल एक शिकायतकर्ता ही समिति की बैठक में उपस्थित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह संबंधित पक्षों से जवाब लेकर नियमित अंतराल पर रिपोर्ट पेश करे। जानें इस मामले में और क्या जानकारी सामने आई है।
 

जंतर मंतर पर प्रदर्शन की हिंसा की जांच


नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच कर रही समिति को अब तक बहुत कम शिकायतें प्राप्त हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह जानकारी दी कि 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की कार्रवाई की जांच कर रही समिति को सीमित शिकायतें मिली हैं।


अदालत ने बताया कि पर्याप्त सबूतों की कमी के कारण समिति अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति ने अदालत को सूचित किया कि शिकायतों के लिए एक पोर्टल और ईमेल की व्यवस्था की गई थी, लेकिन लोगों ने बहुत कम शिकायतें दर्ज कराई हैं।


गौरतलब है कि 29 अक्टूबर को आयोजित समिति की बैठक में केवल एक शिकायतकर्ता हलफनामे के साथ उपस्थित हुआ, जबकि इस बैठक की सूचना पहले ही सार्वजनिक की गई थी और लोगों से शिकायतें लाने की अपील की गई थी।


हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ताओं को पीड़ितों द्वारा प्रस्तुत वीडियो, याचिकाएं और हलफनामे समिति को भेजने की अनुमति दी। इसके साथ ही, समिति को संबंधित पक्षों से जवाब लेकर नियमित अंतराल पर अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 13 अक्टूबर को शिकायत दर्ज करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया था, जिसमें शिकायतकर्ताओं को नाम, आधार नंबर या अन्य पहचान संबंधी जानकारी देने की आवश्यकता नहीं थी। इसके अलावा, समिति ने देशभर के 149 समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर शिकायतें आमंत्रित की थीं। ईमेल, डाक और कार्यालय में सीधे शिकायतें देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी, फिर भी शिकायतों की संख्या बहुत कम रही।