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जम्मू-कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी: आतंकी संगठनों के लिए काम करने का आरोप

जम्मू-कश्मीर में पांच सरकारी कर्मचारियों को आतंकी संगठनों के लिए काम करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें शिक्षक, लैब टेक्नीशियन, ड्राइवर और अन्य शामिल हैं। यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत की गई है। अधिकारियों का कहना है कि ये कर्मचारी लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए काम कर रहे थे। जानें इन कर्मचारियों के बारे में और क्या कार्रवाई की गई है।
 

आतंकी संगठनों के लिए काम करने का आरोप


JK 5 Govt Employees Dismissed, श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में पांच सरकारी कर्मचारियों को आतंकी संगठनों के लिए काम करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें एक शिक्षक, एक लैब टेक्नीशियन, एक ड्राइवर, एक असिस्टेंट लाइनमैन और वन विभाग का एक फील्ड वर्कर शामिल हैं। इन सभी को संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (सी) के तहत निकाला गया। यह कार्रवाई एलजी मनोज सिन्हा द्वारा मंगलवार को की गई।


अधिकारियों के अनुसार, ये सभी लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए काम कर रहे थे। 2021 से अब तक सरकार ने इस तरह की कार्रवाई में 85 कर्मचारियों को बर्खास्त किया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने 8 जनवरी को जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा की समीक्षा बैठक की थी, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियानों को जारी रखने का निर्देश दिया गया था।


इन पर हुई कार्रवाई


  • मोहम्मद इश्तियाक (शिक्षा विभाग): 2013 में शिक्षक के रूप में नियमित हुए। उन पर लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने का आरोप है। 2022 में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या में शामिल होने का आरोप भी है।

  • तारिक अहमद राह (लैब टेक्नीशियन): हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रभाव में रहने का आरोप। 2005 में आतंकी अमीन बाबा की पाकिस्तान भागने में मदद की।

  • बशीर अहमद मीर (असिस्टेंट लाइनमैन, पीएचई विभाग): आतंकियों को मार्गदर्शन और लॉजिस्टिक सहायता देने का आरोप। लंबे समय से गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों में संलिप्त।

  • फारूक अहमद भट (फील्ड वर्कर, वन विभाग): हिजबुल मुजाहिद्दीन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहने का आरोप।

  • मोहम्मद यूसुफ (ड्राइवर, स्वास्थ्य विभाग): हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों के संपर्क में रहने का आरोप। 20 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया गया।