जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित नर्स के मामले में चार्जशीट दाखिल, यासीन मलिक मुख्य आरोपी
1990 का कश्मीरी पंडित नर्स का मामला
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के प्रारंभिक वर्षों में, 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के बलात्कार और हत्या का मामला तीन दशकों से अधिक समय तक अनसुलझा रहा। हाल ही में, सोमवार को स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने प्रतिबंधित जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक और चार अन्य के खिलाफ 737 पृष्ठों की चार्जशीट प्रस्तुत की। यासीन मलिक को इस मामले का मुख्य आरोपी माना गया है। यह चार्जशीट विशेष एनआईए कोर्ट में दाखिल की गई है। इस मामले को 36 वर्षों तक ठंडे बस्ते में रखा गया था।
न्याय की दिशा में एक कदम
एजेंसी ने इसे आतंकवाद के शिकारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। एसआईए ने 2024 में मामले को सौंपे जाने के बाद इसे फिर से खोला और एनआईए की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। यह मामला शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज सौरा में नर्स के रूप में कार्यरत सरला भट के लापता होने और उसके एक दिन बाद मृत पाए जाने से संबंधित है।
आरोपियों की सूची
इस मामले में यासीन मलिक के अलावा, उसके चार सहयोगियों - खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हामिद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सूफी को भी आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर आतंकवाद और विध्वंसक गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1987 और भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
कानून के सामने जवाबदेही
एसआईए ने एक बयान में कहा कि भले ही मामला पुराना हो गया हो, आतंकवाद के लिए यह कोई ढाल नहीं बन सकता। अत्याचारों के लिए जिम्मेदार लोग कानून के समक्ष जवाबदेह रहेंगे। यह मामला मार्च 2024 में एसआईए को सौंपा गया था, और जांच एजेंसी ने पिछले दो वर्षों में कई स्थानों पर छापेमारी की, ताकि सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया जा सके।
दस्तावेज की तैयारी
एसआईए के प्रवक्ता ने बताया कि 737 पन्नों का यह आरोप पत्र, जिसे गहन जांच के बाद तैयार किया गया है, दशकों से एकत्रित मौखिक, दस्तावेजी, फोरेंसिक, बैलिस्टिक, मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का एक मजबूत संग्रह है। लगभग 35 साल बाद आरोप पत्र दाखिल करना आतंकवाद के शिकारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और जम्मू-कश्मीर में पुराने आतंकवादी अपराधों की जांच में यह एक बड़ी सफलता है।
जांच के निष्कर्ष
एसआईए के प्रवक्ता ने कहा, 'जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि इस अपहरण और क्रूर हत्या की साजिश में मोहम्मद यासीन मलिक के साथ खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू शामिल थे। हालांकि, अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मृत्यु हो चुकी है। वर्तमान में मोहम्मद यासीन मलिक एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।'