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जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ NIA का बड़ा ऑपरेशन

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है। इस अभियान के तहत कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है, जिसमें श्रीनगर और शोपियां शामिल हैं। इस संगठन पर आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े आरोप हैं, जिसके चलते इसे फरवरी 2024 में आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था। गृह मंत्रालय ने इस संगठन के आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने की पुष्टि की है। जानें इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी कहानी और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बारे में।
 

जम्मू-कश्मीर में छापेमारी का अभियान


जम्मू-कश्मीर से एक महत्वपूर्ण समाचार आ रहा है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने सोमवार को जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ एक व्यापक ऑपरेशन की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत केंद्रीय और दक्षिण कश्मीर में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की जा रही है।


छापेमारी के स्थान

सूत्रों के अनुसार, श्रीनगर के लाल बाजार और शोपियां जिले के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी की जा रही है। NIA ने इस ऑपरेशन की शुरुआत तब की जब उसे कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं प्राप्त हुईं। उल्लेखनीय है कि इस संगठन को फरवरी 2024 में फिर से आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया गया था।


सूत्रों से मिली जानकारी पर कार्रवाई

NIA के सूत्रों ने बताया कि जम्मू और कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसके चलते एजेंसी ने जमात-ए-इस्लामी से जुड़े कई स्थानों पर छापेमारी की।


इस संगठन पर आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों, अलगाववाद और भारत-विरोधी प्रचार में संलिप्त होने का आरोप है। इसी कारण केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में इसे गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया और अगले पांच वर्षों के लिए प्रतिबंध लगाया। इससे पहले, 2019 में भी इसे गैर-कानूनी संगठन घोषित किया गया था।


भारत में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख

गृह मंत्रालय का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी आतंकवादी संगठनों के साथ निकट संबंध रखता है। इस पर आरोप है कि यह जम्मू और कश्मीर में उग्रवाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है। यह भारतीय क्षेत्र के एक हिस्से को अलग करने की मांगों का समर्थन करता है और ऐसे संगठनों को समर्थन देता है जो आतंकवादी और अलगाववादी समूहों का समर्थन कर रहे हैं।


केंद्रीय गृहमंत्री ने 2024 में इस संगठन पर प्रतिबंधों को बढ़ाते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।