×

जम्मू-कश्मीर में तापमान में तेजी से वृद्धि: पहाड़ों को अधिक खतरा

जम्मू-कश्मीर में तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे पहाड़ों को अधिक खतरा है। आईआईटी खड़गपुर के वैज्ञानिकों के अध्ययन में बताया गया है कि पिछले दो दशकों में हिमालयी क्षेत्र का तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। इस रिपोर्ट में ग्लेशियरों की स्थिति और गर्मी के अन्य कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है। जानें इस अध्ययन के महत्वपूर्ण निष्कर्ष और उनके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

वैज्ञानिकों का अध्ययन और ग्लोबल वार्मिंग


आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया अध्ययन


Jammu-Kashmir Weather: वर्तमान समय में पूरी दुनिया कई प्राकृतिक समस्याओं का सामना कर रही है, जिनमें सबसे गंभीर ग्लोबल वार्मिंग है। औद्योगिक विकास के कारण हम प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे धरती का तापमान तेजी से बढ़ रहा है।


भारत भी इस समस्या से अछूता नहीं है, और यहां के मैदानों से लेकर पहाड़ों तक इस असंतुलन का सामना किया जा रहा है। हाल ही में, आईआईटी खड़गपुर के वैज्ञानिकों ने कश्मीर के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।


जम्मू-कश्मीर का तापमान

रिपोर्ट में बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर का हिमालयी क्षेत्र पिछले दो दशकों में एक डिग्री सेल्सियस गर्म हो चुका है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र निचले क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहे हैं। प्रमुख पर्यटन स्थल जैसे गुलमर्ग, पहलगाम और भद्रवाह इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। शोधकर्ताओं ने 1980 से 2024 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिसमें पाया गया कि हिमालय के मध्य और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान हर दशक औसतन 0.3 डिग्री बढ़ रहा है, जबकि जम्मू जैसे निचले इलाकों में यह वृद्धि लगभग 0.1 डिग्री प्रति दशक रही है।


ग्लेशियरों की स्थिति

रात का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, और कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान हर दशक 0.6 डिग्री तक बढ़ रहा है। इस बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों को फिर से जमने का अवसर नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी पिघलने की गति तेजी से बढ़ रही है। शोध में कहा गया है कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो आने वाले कुछ दशकों में ग्लेशियरों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।


गर्मी के अन्य कारण

शोध में यह भी स्पष्ट हुआ है कि बर्फ के पिघलने से चट्टानें और मिट्टी रोशनी के संपर्क में आती हैं, जिससे अधिक गर्मी सोखी जाती है और तापमान में वृद्धि होती है। वातावरण में बढ़ती नमी भी पहाड़ों के गर्म होने का एक बड़ा कारण है। अतिरिक्त नमी ग्रीनहाउस गैसों की तरह कार्य करती है और रात में गर्मी को वादियों में रोक लेती है, जिससे न्यूनतम तापमान बढ़ता है।