जम्मू-कश्मीर में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्लस्टर प्रणाली लागू
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की नई पहल
मजदूरों को पुलिस स्टेशन में देनी होगी जानकारी, सिक्योरिटी वैरिफिकेशन के बाद मिलेंगी रहने की अनुमति
जम्मू-कश्मीर में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने गंभीर कदम उठाने का निर्णय लिया है। घाटी में फैले प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित स्थानों पर एकत्रित करने के लिए क्लस्टर बनाए जाएंगे। नए आने वाले श्रमिकों को पास के पुलिस स्टेशन में अपनी जानकारी देनी होगी।
जहां वे ठहरेंगे, उस क्षेत्र का सुरक्षा सत्यापन पुलिस द्वारा किया जाएगा। हाल ही में कुलगाम में दो बाहरी श्रमिकों की हत्या के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी इस विषय पर महत्वपूर्ण बैठक की है।
सुरक्षित क्लस्टरों में प्रवासी मजदूरों का स्थानांतरण
घाटी में 199 रजिस्टर्ड भट्ठे हैं, जिनमें से अधिकांश मध्य कश्मीर के बडगाम और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा में स्थित हैं। पुलिस का कहना है कि व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
इसलिए, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को बिखरी हुई झोपड़ियों के बजाय सुरक्षित क्लस्टरों में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आतंकियों द्वारा प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाना
अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से घाटी में गैर स्थानीय प्रवासियों पर हमले बढ़ गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में आतंकवादियों ने लगभग 23 प्रवासी मजदूरों की हत्या की है।
क्लस्टर प्रणाली से सुरक्षा में सुधार
प्रशासन इस क्लस्टर प्रणाली के माध्यम से प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उम्मीद कर रहा है। इससे न केवल श्रमिकों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक शांति मिलेगी। प्रशासन का उद्देश्य इस तरह के उपायों से कश्मीर घाटी में तनाव को कम करना है।