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जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन: मानसून से पहले पहाड़ों का दरकना शुरू

जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन की घटनाएं मानसून से पहले ही शुरू हो गई हैं, जिससे यातायात बाधित हो गया है। डोडा के पास भूस्खलन ने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग को प्रभावित किया है, जबकि चंबा में एक ग्लेशियर गिरने से मजदूरों की जान बच गई। कुल्लू में तेज हवाओं के कारण एक वाहन पर पेड़ गिरने से चार महिलाओं की मौत हो गई। पिछले साल की तुलना में इस बार भी भूस्खलन की घटनाएं चिंताजनक हैं।
 

भूस्खलन से बाधित जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग


डोडा के पास भूस्खलन से यातायात प्रभावित


जम्मू-कश्मीर में डोडा के निकट शनिवार तड़के भूस्खलन की घटना ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को बाधित कर दिया। इससे डोडा-किश्तवाड़ मार्ग पर यातायात ठप हो गया है। इस घटना के कारण सैकड़ों वाहन फंस गए हैं। लगभग 10 घंटे की मेहनत के बाद, डोडा-किश्तवाड़ राजमार्ग को एक तरफ से खोला जा सका है। मलबा हटाने का कार्य जारी है, लेकिन यातायात को पूरी तरह से बहाल करने में समय लग सकता है। यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों से निकालने का प्रयास किया जा रहा है।


चंबा में ग्लेशियर का टूटना

ग्लेशियर गिरने से बड़ा खतरा टला


चंबा में बैरागढ़ सच्चे जोत मार्ग पर एक बड़ा ग्लेशियर गिरने से सड़क पर खतरा उत्पन्न हुआ। इस घटना के समय सड़क पर कार्यरत मजदूरों ने समय रहते आवाज सुनकर भागकर अपनी जान बचाई। यदि वे समय पर सतर्क नहीं होते, तो यह एक बड़ा हादसा हो सकता था। सभी मजदूर सुरक्षित हैं।


कुल्लू में पेड़ गिरने से चार महिलाओं की मौत

तेज हवा के कारण हुआ हादसा


हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में तेज हवाओं के चलते एक वाहन पर पेड़ गिर गया। इस वाहन में छह महिला शिक्षक सवार थीं, जिनमें से चार की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हुई हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हाल के दिनों में प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है।


पिछले साल मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं

भूस्खलन से हुई थी भारी तबाही


पिछले साल मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में 146 से अधिक बड़े भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इसके अलावा, राज्य में 46 बार बादल फटने की घटनाएं भी हुईं। उत्तराखंड में भीषण भूस्खलन और बादल फटने से भारी तबाही हुई, जिसमें कई लोगों की जान गई।