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जलवायु परिवर्तन: आने वाले वर्षों में तापमान में वृद्धि की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान में वृद्धि होगी, जिससे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। 2015 के बाद से सभी 11 सबसे गर्म वर्ष दर्ज किए गए हैं, और यह प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकता है। अल नीनो की स्थिति भी नए तापमान रिकॉर्ड बनाने में योगदान कर सकती है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ भविष्य में और गंभीर हो सकती हैं।
 

गर्मी में वृद्धि की चेतावनी

नई दिल्ली - संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में गर्मी में वृद्धि होगी। वैश्विक तापमान में पहले की तुलना में अधिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जिससे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि जलवायु परिवर्तन की वर्तमान गति वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।


गर्मी के रिकॉर्ड

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, 2015 के बाद से अब तक के सभी 11 सबसे गर्म वर्ष दर्ज किए गए हैं, और यह प्रवृत्ति भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि 2031 से पहले एक नया सबसे गर्म वर्ष देखने को मिल सकता है।


औसत तापमान में वृद्धि

डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक युग से पहले (1850–1900) के स्तर से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इन पांच वर्षों में औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा को पार करने की लगभग 75 प्रतिशत संभावना है। इसके अलावा, 91 प्रतिशत संभावना है कि इस अवधि में कम से कम एक वर्ष ऐसा होगा जब तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाएगा।


अल नीनो का प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 के अंत में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे 2027 में नया तापमान रिकॉर्ड बनने का खतरा बढ़ सकता है। अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान और वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है। पिछले वर्षों में अल नीनो ने 2023 और 2024 को रिकॉर्ड गर्म वर्षों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत से कई गुना अधिक गर्म हो सकता है। इसके अलावा, दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और सूखे के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ

विशेषज्ञों का कहना है कि पेरिस जलवायु समझौते के तहत तय 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को लंबे समय तक बनाए रखना कठिन होता जा रहा है, हालांकि अस्थायी रूप से इसका पार होना अब अधिक संभव माना जा रहा है। रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है, जिससे ऊर्जा नीति और वैश्विक पर्यावरण रणनीतियों पर दबाव बढ़ेगा।