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जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा: महाभियोग प्रक्रिया के बीच बड़ा कदम

जस्टिस यशवंत वर्मा ने महाभियोग प्रक्रिया के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे संसद में चल रही प्रक्रिया रुक गई है। यह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में तीसरी बार है जब किसी सिटिंग जज ने महाभियोग प्रक्रिया शुरू होने से पहले इस्तीफा दिया। जानें इस मामले के पीछे के कारण और इससे जुड़े अन्य जजों के मामलों के बारे में।
 

जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा

जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले वर्ष दिल्ली में उनके निवास से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद उनकी स्थिति पर सवाल उठने लगे थे। उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली थी, और इसी बीच उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज के पद से इस्तीफा दे दिया। इस कदम के साथ ही संसद में उनके खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया भी रुक गई है। महाभियोग के डर के कारण अब तक तीन जज इस्तीफा दे चुके हैं।


महाभियोग प्रक्रिया का इतिहास

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में यह तीसरी बार है जब किसी सिटिंग जज ने महाभियोग प्रक्रिया के शुरू होने से पहले इस्तीफा दिया है। संविधान में जजों को हटाने के लिए एक जटिल प्रक्रिया निर्धारित की गई है। अब तक भारत में किसी भी जज को महाभियोग के जरिए हटाया नहीं गया है। जस्टिस वर्मा के अलावा, दो अन्य जज भी महाभियोग प्रक्रिया के शुरू होने से पहले अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।


जस्टिस सौमित्र सेन का मामला

कलकत्ता उच्च न्यायालय के जज सौमित्र सेन पर 1983 के एक मामले में रिसीवर रहते हुए 33.23 लाख रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा। उन्होंने कोर्ट द्वारा जमा की गई राशि को अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर कर लिया था। जब इस मामले की जांच हुई, तो उन्हें दोषी पाया गया। राज्यसभा ने 2011 में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। यह भारत के इतिहास में पहली बार था जब किसी जज के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव किसी सदन से पारित हुआ। हालांकि, उन्होंने महाभियोग प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।


जस्टिस पीडी दिनाकरण का मामला

पीडी दिनाकरण सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। उन पर कांचीपुरम जिले में लगभग 197 एकड़ सरकारी और निजी भूमि हड़पने का गंभीर आरोप लगा। इसके अलावा, आय से अधिक संपत्ति रखने और पद के दुरुपयोग का मामला भी था। 2009 में सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति की सिफारिश के समय ये आरोप सामने आए। जांच समिति ने आरोपों को सही पाया। महाभियोग शुरू होने से ठीक पहले, 29 जुलाई 2011 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया।


इस्तीफे का कारण

जस्टिस यशवंत वर्मा, पीडी दिनाकरण और सौमित्र सेन ने महाभियोग प्रक्रिया के शुरू होने से पहले इस्तीफा दिया। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इस्तीफा देने के बाद महाभियोग प्रक्रिया समाप्त हो जाती है। इस स्थिति में जज को रिटायरमेंट के सभी लाभ मिलते हैं और उन्हें एक रिटायर्ड जज के रूप में सभी सुविधाएं मिलती रहती हैं।