जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों का भूख हड़ताल, विवादित नारों पर विरोध
भूख हड़ताल की शुरुआत
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मुख्य मांग है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ को पुनर्स्थापित किया जाए और इसके लिए चुनाव कराए जाएं। इसी बीच, यूनिवर्सिटी की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' जैसे विवादास्पद नारे लिखे गए हैं। इन नारों के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और नारे लिखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन नारों को हटा दिया है और परिसर के बाहर पुलिस तैनात कर दी है ताकि कोई बाहरी व्यक्ति अंदर न आ सके। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी छात्रों से मिलने पहुंचे और छात्रसंघ की बहाली का समर्थन किया।
हड़ताल का बढ़ता तनाव
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने पिछले 12 दिनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखा है। 16 अक्टूबर को, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हड़ताल कर रहे छात्रों को परिसर से बाहर निकालने का प्रयास किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। छात्रों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की, जिसके परिणामस्वरूप 6 छात्रों को गंभीर चोटें आईं। छात्रों ने यह भी कहा कि 100 सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें मस्जिद के गेट से गेट नंबर 7 तक ले जाकर अस्पताल भेजा।
विवादित नारों का मामला
जामिया कैंपस की दीवारों पर लिखे गए नारों में 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' शामिल थे। इसके अलावा, वाइस चांसलर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी के खिलाफ भी नारे लिखे गए थे। एबीवीपी ने इन नारों के खिलाफ विरोध जताया और आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की। हालांकि, अभी तक नारे लिखने वालों की पहचान नहीं हो पाई है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए नारों को हटा दिया।
सांसद इमरान मसूद का बयान
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने के बाद, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'वहां 'आजाद कश्मीर' के नारे नहीं लगाए गए। मैंने ऐसे नारों की कड़ी निंदा की और कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। जो लोग कश्मीर से जुड़े पोस्टर लगा रहे थे, वे इस आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। कश्मीर हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा।'
छात्रों की मांगें
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग छात्रसंघ की बहाली है। छात्रसंघ के चुनाव 2006 से बंद हैं और इसके बाद से कोई चुनाव नहीं हुए हैं। इसके अलावा, छात्रों ने यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर असद मलिक के इस्तीफे की भी मांग की है।