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जालंधर में 'युग-युगीन पंजाब' पर संगोष्ठी का आयोजन

जालंधर में आयोजित 'युग-युगीन पंजाब' संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने पंजाब के प्राचीन और वैदिक इतिहास पर 9 शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों और विद्वानों ने पंजाब की ऐतिहासिक विरासत पर गहन चर्चा की। संगोष्ठी में उपस्थित विशेषज्ञों ने पंजाब की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को उजागर किया। जानें इस संगोष्ठी के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।
 

संगोष्ठी का आयोजन

जालंधर - भारतीय इतिहास संकलन समिति (पंजाब) की जालंधर इकाई ने 'युग-युगीन पंजाब' विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम स्थानीय प्रकाशवती सर्व हितकारी विद्यामन्दिर, मिट्ठापुर रोड, जालंधर में हुआ, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्वानों और शोधार्थियों ने कुल 9 शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध पत्रों में पंजाब के प्राचीन, वैदिक और मध्यकालीन इतिहास पर गहन चर्चा की गई।


इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए इतिहास संकलन समिति पंजाब के प्रचार प्रभारी विक्रान्त शर्मा और जालंधर समिति के अध्यक्ष डॉ. राज कुमार सेठ ने बताया कि मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय इतिहास संकलन योजना के सह-संगठन सचिव संजय मिश्र उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में 'दैनिक उत्तम हिन्दू' के प्रधान संपादक इरविन खन्ना ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राजेश ज्योति ने की, जबकि महामंत्री संजय कपूर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।


संगोष्ठी के तीसरे सत्र की अध्यक्षता डी ए वी कॉलेज, जालंधर के उप-प्राचार्य प्रो. कुंवर राजीव ने की। मंच संचालन डॉ. विनीत मेहता ने किया। इस अवसर पर समिति के अन्य सदस्य जैसे शशिकांत लोमश, आशीष सोनी, अनिल तिवारी, राकेश शर्मा, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।


इस दौरान डॉ. अरुणा शुक्ला ने 'सप्तसिंधु का वैदिक आधार', डॉ. राजकुमार ने 'राजा पुरु और पंजाब', और अन्य विद्वानों ने पंजाब के इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर शोध प्रस्तुत किए। मुख्य वक्ता संजय मिश्र ने कहा कि पंजाब की भूमि वेदों की ऋचाओं और राष्ट्र रक्षा के अदम्य साहस का केंद्र रही है। संगोष्ठी के अंत में सभी विद्वानों और अतिथियों को गौरव चिन्ह और दोशाला भेंट किए गए।