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जालंधर सिविल अस्पताल में आग, 20 गर्भवती महिलाएं सुरक्षित निकाली गईं

जालंधर के सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में आग लगने की घटना में 20 गर्भवती महिलाएं सुरक्षित निकाली गईं। सुबह करीब छह बजे धुआं भरने से वार्ड में अफरातफरी मच गई। जूनियर डॉक्टरों ने तत्परता से सभी को बाहर निकाला। आग लगने का कारण एसी का कंप्रेशर बताया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने सभी मरीजों की सुरक्षा की पुष्टि की है।
 

गायनी वार्ड में आग लगने की घटना


जूनियर डॉक्टरों ने समय पर किया बचाव कार्य


जालंधर के सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में एक गंभीर घटना सुबह लगभग छह बजे हुई, जब अचानक धुआं भर गया। इस समय वार्ड में 20 गर्भवती महिलाएं और कुछ नवजात शिशु भर्ती थे। धुएं के कारण वहां अफरातफरी मच गई और चिल्लाने की आवाजें सुनाई देने लगीं।


ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टरों ने तुरंत स्थिति को संभाला और अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ने तेजी से वार्ड में पहुंचकर गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला। फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई, लेकिन आग इतनी भड़क चुकी थी कि दरवाजे को खोलना संभव नहीं था। इसलिए, उन्होंने शीशे तोड़कर अंदर प्रवेश किया।


आग लगने का कारण

एसी के कंप्रेशर में आई गर्मी से हुआ हादसा


गर्भवती महिलाओं के परिजनों के अनुसार, गर्मी के कारण एसी का कंप्रेशर हीट हो गया, जिससे तारें गलने लगीं और शॉर्ट सर्किट हुआ। इसके परिणामस्वरूप आग लग गई और धुएं के काले गुबार निकलने लगे। आग की लपटों ने पास रखे अन्य सामान को भी अपनी चपेट में ले लिया। वार्ड में धुआं भरते ही परिवारों में हड़कंप मच गया और उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया।


जूनियर डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को बचाने के लिए तत्परता दिखाई और समय रहते उन्हें बाहर निकाल लिया।


अस्पताल प्रशासन का बयान

सुरक्षा सुनिश्चित की गई


अस्पताल के सुरक्षा इंचार्ज ने बताया कि इस घटना में किसी भी प्रकार का जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। सभी मरीज और बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हालांकि, आग की चपेट में आने से कमरे में रखे बेड, गद्दे, बिजली के उपकरण और अन्य जरूरी सामान जलकर राख हो गए। आग इतनी भीषण थी कि कमरे की दीवारें भी काली पड़ गईं।