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जुड़वां बहनों के अद्वितीय बायोमीट्रिक पैटर्न से आधार कार्ड में आई बाधा

रामपुर की जुड़वां बहनों तूबा और खिजरा के समान बायोमीट्रिक पैटर्न ने आधार कार्ड बनाने में बाधा उत्पन्न की। जब उनकी पहचान के लिए आवश्यक स्कैनिंग प्रक्रिया विफल हो गई, तो उनके पिता जुबैर ने डीएम से मदद मांगी। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों से बात की और विशेष परिस्थितियों में उनके आधार कार्ड जारी करने की अनुमति प्राप्त की। यह कहानी विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत मेल को दर्शाती है।
 

रामपुर की जुड़वां बहनों की कहानी

लखनऊ। अक्सर यह कहा जाता है कि विज्ञान और तकनीक कितनी भी उन्नति कर लें, लेकिन ईश्वर के चमत्कारों के आगे वे बौने साबित होते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अद्भुत उदाहरणों के बावजूद, कई लोग प्रकृति की शक्ति को प्राथमिकता देते हैं।

रामपुर की जुड़वां बहनों ने इस बात को साबित कर दिया है, जब उनकी बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली विफल हो गई। इन बहनों के रेटिना और अंगूठे के निशान एक समान होने के कारण आधार कार्ड बनाने में समस्या आई। यह वैज्ञानिक मान्यता के खिलाफ है कि दो व्यक्तियों के अंगूठे के निशान कभी समान नहीं हो सकते। इसलिए, बायोमीट्रिक प्रणाली का उपयोग पहचान के लिए किया जाता है।

रामपुर जिले के खारी कुआं के निवासी जुबैर इल्यास की जुड़वां बेटियाँ तूबा और खिजरा हैं। जुबैर ने बताया कि जब उनकी बेटियाँ हाईस्कूल में पहुंचीं, तब उन्होंने तूबा का आधार कार्ड बनवा लिया, लेकिन खिजरा का आधार कार्ड बनवाने में समस्या आई। जब खिजरा का रेटिना और अंगूठे के निशान स्कैन किए गए, तो प्रक्रिया रुक गई। कार्ड सेंटर के संचालक ने बताया कि खिजरा के रेटिना और फिंगर प्रिंट का पैटर्न डुप्लीकेट है।

जुबैर ने अन्य सेंटरों पर भी प्रयास किए, लेकिन हर जगह यही समस्या आई। सभी ने कहा कि प्रकृति ने ऐसा बनाया है कि किसी भी दो व्यक्तियों के अंगूठे और रेटिना के निशान समान नहीं हो सकते। इस समस्या के कारण जुबैर ने डीएम अजय कुमार द्विवेदी के कार्यालय में जाकर अपनी परेशानी बताई। डीएम भी इस अनोखी स्थिति को सुनकर चकित रह गए।

बेटियों की पढ़ाई में रुकावट और पहचान के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता को देखते हुए, डीएम ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने उच्च अधिकारियों से बात की और विशेष परिस्थितियों में जुड़वां बहनों के आधार कार्ड जारी करने की अनुमति प्राप्त की।

तीन महीने का संघर्ष

जुड़वां बहनों के आधार कार्ड न बनने के कारण जुबैर ने लगभग तीन महीने पहले डीएम के सामने अपनी समस्या रखी थी। रेटिना और अंगूठे के निशान की स्कैनिंग की अनिवार्यता के कारण स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हो सका।

इसलिए, डीएम ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के सीईओ भुवनेश कुमार से संपर्क किया। सीईओ ने लखनऊ मुख्यालय को निर्देशित किया, जिसके बाद डीएम ने लगातार फॉलोअप किया। अंततः विशेष परिस्थितियों में जुड़वां बहनों के आधार कार्ड का मामला सुलझा।