ज्ञानवापी विवाद में समझौते की संभावना समाप्त, दोनों पक्षों ने किया इनकार
ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता प्रक्रिया का अंत
नई दिल्ली। वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद में समझौते की संभावनाएं अब समाप्त होती दिख रही हैं। मंगलवार को मध्यस्थता प्रक्रिया के तहत हुई सुनवाई में मंदिर और मस्जिद दोनों पक्षों ने किसी भी प्रकार के समझौते से स्पष्ट इनकार कर दिया। दोनों ने अदालत के निर्णय को अंतिम और स्वीकार्य माना।
सुनवाई के दौरान चार अलग-अलग मामलों से जुड़े पक्षकार और उनके वकील उपस्थित रहे। सभी से मध्यस्थता पर राय ली गई, लेकिन किसी ने भी समझौते की इच्छा नहीं दिखाई। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई मध्यस्थता प्रक्रिया बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गई। मंदिर पक्ष की ओर से अधिवक्ता रेखा पाठक, शैलेंद्र पाठक और अन्य वकील मौजूद थे। उनका कहना था कि ज्ञानवापी परिसर मूल रूप से मंदिर है और वहां पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर के तलगृह में पहले से पूजा जारी है, इसलिए समझौते का कोई प्रश्न नहीं उठता।
मस्जिद पक्ष की ओर से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के प्रतिनिधि और वकील भी सुनवाई में शामिल हुए। हालांकि पहले उनके मध्यस्थता प्रक्रिया से दूरी बनाने की चर्चा थी, लेकिन वे अदालत पहुंचे और अपनी बात रखी। मस्जिद पक्ष ने भी अपने कानूनी रुख पर कायम रहते हुए विवाद का समाधान अदालत के माध्यम से ही करने की बात कही।
ज्ञानवापी परिसर को लेकर दोनों पक्षों के दावे लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन हैं। हिंदू पक्ष का कहना है कि मस्जिद के नीचे प्राचीन आदि विश्वेश्वर मंदिर के अवशेष मौजूद हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे वक्फ संपत्ति मानते हुए पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का हवाला देता है, जो 15 अगस्त 1947 के बाद धार्मिक स्थलों के स्वरूप में बदलाव पर रोक लगाता है।
इस मामले में पहले कराए गए एएसआई सर्वे को लेकर भी दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। फिलहाल ज्ञानवापी विवाद से जुड़े विभिन्न मुकदमे वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अब आगे की सुनवाई और न्यायालय के फैसले पर सभी की नजर बनी हुई है।