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झांसी पुलिस ने फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़

झांसी पुलिस ने एक फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके पुरुषों को जाल में फंसाता था। गिरोह ने पिछले तीन से चार वर्षों में 40 से अधिक उम्र के अविवाहित पुरुषों को निशाना बनाया। पुलिस ने छापेमारी के दौरान 9 महिलाओं और 2 पुरुषों को गिरफ्तार किया और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। जानें इस गिरोह की कार्यप्रणाली और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा


झांसी पुलिस ने एक ऐसे फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करके आकर्षक महिलाओं की तस्वीरें बनाकर पुरुषों को व्हाट्सऐप पर भेजता था। इसके बाद, ये पुरुषों से बातचीत कर उन्हें जाल में फंसाते थे और फिर ब्लैकमेल करते थे। यह गिरोह पिछले तीन से चार वर्षों से 40 साल से अधिक उम्र के अविवाहित पुरुषों को निशाना बना रहा था।


गिरोह की कार्यप्रणाली

पुलिस की जांच में पता चला है कि गिरोह पहले अखबारों में प्रकाशित मैट्रिमोनियल विज्ञापनों की तलाश करता था। इसके बाद, वे उन विज्ञापनों में दिए गए नंबरों पर कॉल करते थे। कॉल करने वाला व्यक्ति पहले नमस्ते कहकर बातचीत शुरू करता था और फिर शादी के लिए रिश्ते का विज्ञापन देखने की बात करता था। कॉलर की आवाज इतनी विश्वसनीय होती थी कि लोग उस पर विश्वास कर लेते थे।


एआई से तैयार की गई तस्वीरें

गिरोह के सदस्य एआई की मदद से पुरुषों की पसंद के अनुसार खूबसूरत महिलाओं की तस्वीरें तैयार करते थे। इसके बाद, पुरुषों को इन तस्वीरों के साथ बातचीत करने के लिए प्रेरित किया जाता था। कई बार, अश्लील बातें भी करवाई जाती थीं। पुरुषों को यह विश्वास होता था कि वे अपनी होने वाली पत्नी से बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता था कि उनकी बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है।


पुलिस की कार्रवाई

जब पुलिस ने छापेमारी की, तो उन्हें एक सामान्य कार्यालय जैसा माहौल मिला। वहां 9 महिलाएं और 2 पुरुष गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने मौके से 26 मोबाइल फोन, एक मैकबुक, आईफोन, रजिस्टर और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए। रजिस्टरों की जांच में लगभग 41 लाख रुपए के लेन-देन का रिकॉर्ड भी मिला।


महिलाओं को दी जाती थी ट्रेनिंग

पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर में काम करने वाली महिलाओं को केवल फोन उठाने का काम नहीं दिया जाता था। उन्हें यह सिखाया जाता था कि कैसे सामने वाले का विश्वास जीतना है, बातचीत को कैसे आगे बढ़ाना है और कब भावनात्मक जुड़ाव बनाना है।