झारखंड का आईटीआई कॉलेज: 11 साल बाद भी नहीं शुरू हुई पढ़ाई
हजारीबाग का आईटीआई कॉलेज: एक बर्बाद सपना
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के इचाक क्षेत्र में युवाओं को तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लगभग ₹8.48 करोड़ की लागत से निर्मित सरकारी आईटीआई कॉलेज आज पूरी तरह से बेकार हो चुका है। यह आश्चर्यजनक है कि इस भव्य भवन का उद्घाटन 11 साल पहले किया गया था, लेकिन अब तक यहां कोई कक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं।
भव्य भवन की दुर्दशा
इस कॉलेज का निर्माण 2015 में पूरा हुआ था और इसके उद्घाटन के साथ ही बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन इसके बाद से प्रशिक्षण विभाग ने इसे संचालित करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। आज स्थिति यह है कि करोड़ों की लागत से बना यह कॉलेज बिना पक्की सड़क के है, जिससे छात्रों को नाले और झाड़ियों से भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है।
खंडहर में तब्दील
प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह भवन अब खंडहर जैसा दिखता है। परिसर में चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं, खिड़कियों के कांच टूट चुके हैं और दीवारों पर सीलन आ गई है।
ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
सरकारी लापरवाही का नतीजा यह है कि यहां कोई स्थायी सुरक्षा गार्ड नहीं है। स्थानीय ग्रामीण खुद बिना बिजली के अंधेरे में रहकर इस भवन की सुरक्षा कर रहे हैं, ताकि लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति चोरी न हो सके।
युवाओं का भविष्य खतरे में
इस आईटीआई कॉलेज की स्थापना का उद्देश्य इचाक और आसपास के ग्रामीण युवाओं को फिटर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य तकनीकी ट्रेडों में प्रशिक्षित करना था। लेकिन अब यह परियोजना फाइलों में दबकर रह गई है, जिससे स्थानीय गरीब परिवारों के बच्चे तकनीकी शिक्षा से वंचित रह गए हैं। इस स्थिति के कारण युवाओं को महंगे निजी संस्थानों में जाना पड़ रहा है या फिर अन्य राज्यों में मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले में कई बार शिकायत की, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।
स्थानीय लोगों का आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने जनता के पैसे को बर्बाद कर दिया है। भवन भले ही तैयार है, लेकिन मशीनें धूल खा रही हैं। इसके बावजूद अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।