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झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम चुनाव में अकेले लड़ने का लिया निर्णय

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी और BJP को चुनौती देगी। JMM का लक्ष्य असम के चाय बागान मजदूरों का समर्थन प्राप्त करना है, जो झारखंड से जुड़े हैं। जानें इस चुनावी रणनीति के पीछे की कहानी और हेमंत सोरेन की रैलियों के बारे में।
 

असम विधानसभा चुनाव में JMM का बड़ा कदम


असम चुनाव। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी और सीधे भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनौती देगी। असम में मतदान 9 अप्रैल को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। JMM का प्रयास था कि वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े। इसके लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिल्ली जाकर कांग्रेस नेताओं से कई बार बातचीत की। इस दौरान AICC महासचिव जितेंद्र सिंह और असम कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई भी शामिल हुए, लेकिन सीट बंटवारे पर कोई सहमति नहीं बन सकी।


इसके बाद, JMM ने बिना गठबंधन के चुनावी रणनीति के तहत अकेले चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया। पार्टी के महासचिव विनोद पांडे ने स्पष्ट किया कि JMM असम में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश करेगी। JMM का सबसे बड़ा आधार असम के लगभग 70 लाख चाय बागान मजदूर हैं, जो मूल रूप से झारखंड और आस-पास के क्षेत्रों से जुड़े हैं। पार्टी को उनसे समर्थन मिलने की उम्मीद है। JMM का मानना है कि आदिवासी अधिकार और भूमि के मुद्दे पर ये वर्ग उनके साथ आ सकता है। हेमंत सोरेन ने असम में पहले ही कई रैलियां की हैं, जिनमें उन्होंने अच्छी भीड़ जुटाई है।


चुनाव प्रचार में हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पार्टी के प्रमुख चेहरे होंगे। पार्टी जल्द ही सभी उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी। फिलहाल, प्रीति रेखा बारला को मजबात सीट से और बलदेव तेली को सोनारी सीट से उम्मीदवार के रूप में तय किया गया है।