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झारखंड में JSSC और JPSC परीक्षा में गड़बड़ी: CID की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

झारखंड में JSSC और JPSC परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच में CID ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर दिए गए थे, और लाखों रुपये का लेन-देन हुआ। अभय तिवारी नामक आरोपी ने खुद परीक्षा में उच्च रैंक प्राप्त की थी। CID अब इस मामले में बड़े सिंडिकेट की जांच कर रही है, जिसमें पूर्व अधिकारियों और कोचिंग संचालकों की भूमिका भी शामिल है। जानें इस मामले की पूरी कहानी।
 

CID की जांच में सामने आईं नई जानकारियाँ


नई दिल्ली: झारखंड में JSSC CGL और JPSC परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही CID ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, JSSC CGL परीक्षा में कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही प्रश्न और उनके उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। वहीं, JPSC में विभिन्न चरणों के चयन के लिए लाखों रुपये का लेन-देन होने का आरोप है।


65 सवालों के लिए 12 लाख रुपये की डील

जांच में गिरफ्तार अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से पूछताछ के दौरान यह जानकारी मिली कि बोकारो में लगभग 15 उम्मीदवारों से 12-12 लाख रुपये लिए गए। कुल मिलाकर यह राशि लगभग 1.80 करोड़ रुपये बताई गई है।


आरोप है कि इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले 65 सवाल और उनके उत्तर मुहैया कराए गए थे। इस दौरान प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी से जुड़े व्यक्तियों की भी भूमिका की जांच की जा रही है।


अभय तिवारी का चयन और उसके परिवार का मामला

जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी ने JSSC CGL परीक्षा में 48वीं रैंक प्राप्त की थी। गिरफ्तारी के समय वह गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत था।


उसके भाई अक्षय तिवारी और भाभी सुषमा कुमारी के भी इसी परीक्षा में चयनित होने की जानकारी मिली है। CID अब इन सभी कड़ियों की गहराई से जांच कर रही है।


JPSC में पैसों के लेन-देन का आरोप

पूछताछ में JPSC की परीक्षाओं में भी पैसों के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से लगभग 5 लाख रुपये और SC-ST उम्मीदवारों से 2 से 3 लाख रुपये तक लिए जाने का आरोप है।


फाइनल चयन के लिए कथित तौर पर 60 से 70 लाख रुपये की राशि तय की गई थी। इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के लिए प्रति उम्मीदवार 15 लाख रुपये तक की मांग की गई थी।


CID की जांच में बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश

अभय तिवारी के बयान के आधार पर CID ने कथित परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े कई लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। इसमें कुछ पूर्व JPSC अधिकारियों, कोचिंग संचालकों और परीक्षा से संबंधित एजेंसियों के नाम भी शामिल हैं।


जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस सिंडिकेट के माध्यम से कुछ उम्मीदवारों को इंटरव्यू में लाभ पहुंचाकर सरकारी पद दिलाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।