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झारखंड में अस्पताल की लापरवाही से 5 बच्चे HIV संक्रमित, हाई कोर्ट में मुआवजे की मांग

झारखंड के चाईबासा में एक अस्पताल की लापरवाही के कारण पांच बच्चे HIV संक्रमित हो गए हैं। यह मामला अब झारखंड उच्च न्यायालय में पहुंच चुका है, जहां पीड़ित परिवारों ने 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। बच्चों की उम्र 5 से 7 वर्ष है और वे गंभीर बीमारी थैलेसीमिया से ग्रसित हैं। इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें इस मामले की पूरी कहानी और सरकार की प्रतिक्रिया।
 

चौंकाने वाला मामला सामने आया

नई दिल्ली - चाईबासा के सदर अस्पताल से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें आरोप है कि लापरवाही के कारण पांच छोटे बच्चे HIV से संक्रमित हो गए हैं। इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और मामला अब झारखंड उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है।


घटना का विवरण

क्या हुआ?
यह घटना अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है। प्रभावित बच्चे 5 से 7 वर्ष के हैं और Thalassemia Major जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, जिसके लिए उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। आरोप है कि अस्पताल के ब्लड बैंक से दिया गया खून पहले से संक्रमित था। यह मामला तब उजागर हुआ जब एक 7 वर्षीय बच्चे की HIV जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि उसके माता-पिता की रिपोर्ट नेगेटिव आई। इससे यह संदेह हुआ कि संक्रमण रक्त चढ़ाने के दौरान हुआ।


हाई कोर्ट में याचिका

क्या मांगा गया?
पीड़ित परिवारों की ओर से वकील मोहम्मद शादाब अंसारी ने याचिका दायर की है, जिसमें कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं। इनमें हर बच्चे को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, जीवनभर मुफ्त सुरक्षित रक्त ट्रांसफ्यूजन और HIV की दवाएं उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। इसके अलावा, बच्चों के लिए पोषक आहार, पक्का आवास और स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड के गठन की भी मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि परिवारों को सामाजिक भेदभाव से बचाने के लिए काउंसलिंग और सुरक्षा प्रदान की जाए।


सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार की मदद पर सवाल
झारखंड सरकार ने मामले में कुछ अधिकारियों को निलंबित कर 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। हालांकि, याचिका में इसे नाकाफी बताते हुए इसे “ऊंट के मुंह में जीरा” करार दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन बताया है और इस गंभीर लापरवाही के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।


सामाजिक बहिष्कार का संकट

गरीबी और भेदभाव
पीड़ित बच्चे आदिवासी और ओबीसी समुदाय से हैं। उनके परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। HIV संक्रमण की खबर के बाद उन्हें सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और यहां तक कि घरों से निकाले जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


स्वास्थ्य तंत्र की खामियां

यह मामला न केवल स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि एक लापरवाही कैसे मासूम जिंदगियों पर गहरा असर डाल सकती है।