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झारखंड सरकार की भर्ती परीक्षा विवाद पर संगठनों से वार्ता, प्रदर्शन जारी

झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। हालांकि, कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका, और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने अपनी सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। सरकार की समिति ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को उचित मानते हुए मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया। इस बीच, प्रदर्शन का 15वां दिन है, और अभ्यर्थी स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
 

झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद


झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच शनिवार को विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने अपनी सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।


सरकार की पांच सदस्यीय समिति ने पहले जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारी समूह से मुलाकात की, जो इस मुद्दे पर अनशन कर रहे हैं। समिति में राज्य के तीन मंत्री भी शामिल हैं। इसके बाद, समिति ने कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, एसीएस और जेसीएम के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की।


इससे पहले, शुक्रवार रात को सरकार ने जेपीएससी/जेएसएससी रिफॉर्म मंच के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भी वार्ता की थी।


सरकार की समिति के सदस्य और राज्य के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगें उचित हैं और हम इन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखेंगे।


झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की छात्र इकाई, झारखंड छात्र मोर्चा (जेसीएम) ने सरकार के सामने पांच मांगें रखीं, जिनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की मांग भी शामिल है।


एनएसयूआई के प्रवक्ता संजीव शाह ने बताया कि संगठन ने सरकार के सामने छह मांगें रखीं, जिनमें सभी संदिग्ध जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच और झारखंड परीक्षा एजेंसी (जेटीए) की स्थापना की मांग शामिल है।


आदिवासी छात्र संघ के नेता कार्तिक उरांव ने कहा कि हमने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को योग्यता परीक्षा के रूप में शामिल करने की मांग की है। इसके अलावा, जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं पाई गई हैं, उन्हें रद्द करने की भी मांग की गई है।


राज्य के मंत्री चामरा लिंडा ने कहा कि यह संभवतः छात्र संगठनों के साथ हमारी अंतिम बैठक थी। उन्होंने भर्ती में रिक्तियों और जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के मुद्दे उठाए।


सरकार की समिति की पहली बैठक महतो गुट के जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी मंच के साथ हुई, जो लगभग दो घंटे तक चली।


मंच के एक नेता ने बैठक के बाद कहा कि सरकार ने हमारी ओर से उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। हालांकि, 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने समेत हमारी सभी मांगें पूरी होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।


राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में जो विसंगतियां बताई हैं उनका जल्द समाधान किया जाएगा।


उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए अभ्यर्थियों से सुझाव लेने के लिए ई-मेल आईडी जारी की है। पेपर लीक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन का शनिवार को 15वां दिन है।


देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि हम 14वीं झारखंड पीएससी सिविल सेवा परीक्षा और उस एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि छात्र पिछले दो सप्ताह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए राज्य सरकार को उनकी मांगें तुरंत पूरी करनी चाहिए।


महतो ने कहा कि सरकार को इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। यह देखना होगा कि वह इन मांगों पर क्या कदम उठाती है।


प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति गठित की जाए।


अब तक जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से 28 जुलाई से अब तक चार बार पूछताछ की जा चुकी है।