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झारखंड सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ उठाया बड़ा कदम

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद, हेमंत सोरेन सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस कदम से छात्रों में खुशी है, लेकिन पहले से चयनित कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा है। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और सरकार की नई पहल के बारे में।
 

मुख्य समाचार

रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध के चलते हेमंत सोरेन सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग ने अधिसूचना जारी की है कि JSSC-CGL सहित 22 प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह से रद्द कर दी गई हैं। इसके अलावा, छह अन्य परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित किया गया है और 2014 से अब तक हुई 17 संदिग्ध परीक्षाओं और नियुक्तियों की जांच CID को सौंपी गई है।


रद्द की गई परीक्षाएं

रद्द की गई परीक्षाओं में JSSC-CGL, संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, ड्रग इंस्पेक्टर, सरकारी पॉलिटेक्निक में लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी महत्वपूर्ण नियुक्तियां शामिल हैं। इसके साथ ही, छह अन्य तकनीकी और प्रशासनिक परीक्षाओं के आयोजन पर भी रोक लगा दी गई है। 2014 के बाद से जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से संपन्न हुई 17 विवादित परीक्षाओं की गहन जांच राज्य की सीआईडी द्वारा की जाएगी। जानकारी के अनुसार, रद्द की गई 22 परीक्षाओं में से 19 का आयोजन आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल के माध्यम से हुआ था, जिसके सभी टेंडरों और परिणामों को निरस्त कर दिया गया है।


छात्रों का आंदोलन

पिछले 25 दिनों से झारखंड में छात्र संगठन और अभ्यर्थी परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के हित में यह निर्णय लिया, जिसके बाद आंदोलनकारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी है।


उच्च स्तरीय समिति का गठन

सरकार ने भविष्य में पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं आयोजित करने के लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय सुधार समिति का गठन किया है। यह समिति दो महीने के भीतर परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।


नियुक्त कर्मियों की चिंताएं

इस निर्णय से जहां अभ्यर्थियों में खुशी है, वहीं पहले से चयनित 2,628 अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। चयनित अभ्यर्थियों ने इस फैसले के विरोध में प्रोजेक्ट भवन और सचिवालय के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय केवल दोषियों को चिन्हित कर सजा दी जाए।