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झारखंड हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: विवाहेतर संबंधों के दबाव को मानसिक क्रूरता माना

झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में विवाहेतर संबंधों के दबाव को मानसिक क्रूरता मानते हुए एक डॉक्टर दंपति की शादी को समाप्त करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि पति का पत्नी पर दूसरी महिला के साथ संबंध स्वीकार करने का दबाव डालना, वैवाहिक रिश्ते की नींव को हिलाने वाला है। इस मामले में पति-पत्नी के बीच विश्वास टूटने के कारण विवाह का कानूनी अंत हुआ। जानिए इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी और अदालत की टिप्पणियाँ।
 

महत्वपूर्ण निर्णय पर झारखंड हाई कोर्ट की टिप्पणी

नई दिल्ली: झारखंड उच्च न्यायालय ने वैवाहिक संबंधों में मानसिक क्रूरता के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई पति अपनी पत्नी पर विवाहेतर संबंध को स्वीकार करने का दबाव डालता है, तो यह मानसिक क्रूरता का गंभीर मामला है। इसी आधार पर, हाई कोर्ट ने एक चिकित्सक दंपति के विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति का अपनी प्रेमिका को पत्नी की 'छोटी बहन' के रूप में स्वीकार करने के लिए कहना, वैवाहिक संबंध की नींव को हिलाने वाला कार्य है।


पति ने प्रेमिका को छोटी बहन मानने का दबाव डाला

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने फैमिली कोर्ट के पूर्व निर्णय को पलटते हुए यह टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मामले में मौजूद सबूतों का सही आकलन नहीं किया और सभी तथ्यों को एक साथ देखने में चूक गई। इसके अलावा, वैवाहिक विवादों में 'संभावनाओं की प्रबलता' के सिद्धांत पर भी उचित ध्यान नहीं दिया गया।


डॉक्टर दंपति का अलगाव और विवाद

अदालत ने कहा कि विवाह का संबंध आपसी विश्वास, सम्मान और साझा अनुभवों पर आधारित होता है। जब पति-पत्नी के बीच विश्वास टूटता है, तो संबंध को पुनर्स्थापित करना कठिन हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को पति के दूसरी महिला के साथ संबंध को स्वीकार करने के लिए मजबूर करना, वैवाहिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।


डॉक्टर दंपति का विवाद और आरोप

यह दंपति पेशे से डॉक्टर हैं और उनकी शादी फरवरी 2018 में हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद, वे सितंबर 2019 से अलग रहने लगे थे। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति का एक विधवा महिला के साथ विवाहेतर संबंध था। परिवार के हस्तक्षेप के बाद पति ने भरोसा दिलाया कि वह उस महिला से संपर्क खत्म कर देगा, लेकिन पत्नी के अनुसार, उसने संबंध जारी रखा। विरोध करने पर पति ने पत्नी के साथ मारपीट की, जिससे उसे स्वास्थ्य समस्याएं हुईं।


पति ने आरोपों का खंडन किया

पति ने इन आरोपों को नकारते हुए पत्नी के पिता के क्लिनिक से जारी मेडिकल पर्चों को फर्जी बताया। उसने जनवरी 2023 में वैवाहिक अधिकारों की बहाली के पक्ष में एकतरफा आदेश मिलने का भी हवाला दिया।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेडिकल पर्चों को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वे पत्नी के पिता के क्लिनिक से जारी हुए थे। अदालत ने माना कि पति के व्यवहार के कारण पत्नी को वैवाहिक घर छोड़ना पड़ा था। इन्हीं तथ्यों और मानसिक क्रूरता के आधार पर हाई कोर्ट ने शादी समाप्त करने का फैसला सुनाया।