टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में बिश्नोई गैंग का वित्तीय नेटवर्क उजागर
फायरिंग मामले की जांच में नया खुलासा
नई दिल्ली: अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। जांच में पता चला है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने मुंबई में शूटरों तक पैसे पहुंचाने के लिए स्थानीय ऑटो-रिक्शा चालकों और छोटे दुकानदारों के बैंक खातों का सहारा लिया।
गैंग ने कमीशन का लालच देकर इन चालकों से उनके यूपीआई क्यूआर कोड प्राप्त किए और हरियाणा से इन खातों में पैसे ट्रांसफर किए। इस नेटवर्क का उद्देश्य अपनी गतिविधियों को छिपाना और जांच एजेंसियों को गुमराह करना था।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस मनी ट्रेल में विदेश में बैठे गैंग के कथित मुख्य सदस्य अनिल पंडित का नाम सामने आया है। आरोप है कि अनिल पंडित मुंबई में मौजूद शूटरों को लगातार निर्देश देता था। उसके कहने पर शूटर स्थानीय रिक्शा चालकों और दुकानदारों से संपर्क करते थे और उन्हें कमीशन देने का लालच देते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि शूटर पहले रिक्शा चालकों और दुकानदारों से उनके यूपीआई क्यूआर कोड हासिल करते थे। इसके बाद ये कोड अनिल पंडित को भेजे जाते थे, जो इन्हें अपने छोटे भाई अभिषेक पंडित तक पहुंचाता था। आरोप है कि अभिषेक की पत्नी सुनेहा पंडित हरियाणा के करनाल से इन क्यूआर कोड को स्कैन कर पैसे ट्रांसफर करती थी। इसके बाद शूटर संबंधित व्यक्ति को कमीशन देकर बाकी रकम नकद ले लेते थे।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, वारदात से पहले शूटरों ने मुंबई में घूमने और विभिन्न स्थानों तक पहुंचने के लिए ऑटो-रिक्शा का काफी इस्तेमाल किया। इस दौरान वे चालकों से कहते थे कि उनका कोई दोस्त या रिश्तेदार सीधे उनके खाते में पैसे भेज देगा। खाते में रकम आने के बाद शूटर अपना किराया या जरूरी खर्च काटकर बाकी पैसे नकद ले लेते थे।
इसी तरह होटल, ढाबों और दुकानों पर भी इस तरीके का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान एक दुकानदार के क्यूआर कोड पर 1,510 रुपए ट्रांसफर किए जाने का मामला सामने आया। इसमें दुकानदार को 10 रुपए कमीशन दिया गया और बाकी 1,500 रुपए नकद ले लिए गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, गैंग ने वित्तीय लेन-देन के सीधे सुराग से बचने के लिए आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया।
हालांकि, क्राइम ब्रांच ने डिजिटल फोरेंसिक और तकनीकी निगरानी की मदद से इस मनी ट्रेल की कई अहम कड़ियों का पता लगा लिया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुनेहा पंडित ने कुल कितनी रकम मुंबई में मौजूद शूटरों और साजिश में शामिल अन्य आरोपियों तक पहुंचाई थी।
अनिल पंडित का छोटा भाई अभिषेक पंडित फिलहाल वांछित है और खुफिया एजेंसियों को शक है कि वह विदेश में छिपा हुआ है। उस पर क्रिप्टो वॉलेट और हवाला नेटवर्क के जरिए गैंग के वित्तीय लेन-देन को संचालित करने का शक है। उसके खिलाफ हरियाणा में भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
इसी बीच, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर दिल्ली में एक अस्पताल संचालक से 20 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने का मामला भी सामने आया है। शिकायतकर्ता शकील सैफी ने दिल्ली के निहाल विहार थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया है कि अनिल पंडित नाम बताने वाले एक शख्स ने उन्हें व्हाट्सऐप कॉल कर 20 करोड़ रुपए देने की धमकी दी।
एफआईआर के मुताबिक, शकील सैफी निहाल विहार स्थित सैफी अस्पताल के मालिक हैं और अपने बेटे रिजवान सैफी के साथ अस्पताल चलाते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 2 नवंबर को उनके व्हाट्सऐप नंबर पर एक वॉयस नोट आया था, जिसमें 20 करोड़ रुपए की मांग की गई थी। इसके अगले दिन 3 नवंबर को ब्रिटेन के कंट्री कोड वाले एक नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का अनिल पंडित बताया और 20 करोड़ रुपए की मांग की। साथ ही, 24 घंटे का समय देते हुए धमकी दी कि उनके दोनों बेटों की रेकी करवाई जा चुकी है। शकील सैफी ने अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।