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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की फैक्ट्री पर प्रदूषण का आरोप, तमिलनाडु में विवाद बढ़ा

तमिलनाडु में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन पार्ट्स बनाने वाली फैक्ट्री पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कंपनी पर आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के खेतों और कुओं का जल दूषित कर रहा है। यदि कंपनी संतोषजनक उत्तर नहीं देती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला न केवल टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए, बल्कि एपल की भारत में बढ़ती सप्लाई चेन के लिए भी महत्वपूर्ण है। जानें इस विवाद के संभावित प्रभाव और कंपनी की प्रतिक्रिया।
 

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की फैक्ट्री में प्रदूषण का मामला


तमिलनाडु में स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन पार्ट्स बनाने वाली फैक्ट्री एक नए विवाद में फंस गई है। राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी के कारण आसपास के खेतों और कुओं का जल दूषित हो गया है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी संतोषजनक उत्तर नहीं देती है, तो फैक्ट्री की बिजली काटने और उसे बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है।


फैक्ट्री का स्थान और किसानों की शिकायतें

यह फैक्ट्री होसुर क्षेत्र में स्थित है, जहां आईफोन के बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण घटक बनाए जाते हैं। आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री का वेस्टवाटर उनके खेतों और कुओं के पानी को खराब कर रहा है। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मामले की जांच शुरू की और कई बार प्लांट का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि वर्षा जल संचयन के लिए बनाए गए तालाब में गंदा पानी छोड़ा गया था, जिससे आसपास के इलाके प्रभावित हुए।


टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का जवाब

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक स्वतंत्र और मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी की जांच कराई है, जिसमें सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन होने की पुष्टि हुई है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और प्रदूषण बोर्ड को अपना विस्तृत उत्तर भेज दिया है।


एपल की सप्लाई चेन पर प्रभाव

यह मामला केवल टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे एपल की भारत में बढ़ती सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में, एपल ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स अब एपल की प्रमुख सप्लायर कंपनियों में से एक है और भारत में आईफोन निर्माण के विस्तार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।


आगे की कार्रवाई

अब सभी की नजर तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अगले कदम पर है। यदि कंपनी का उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो प्लांट के संचालन पर असर पड़ सकता है। यदि टाटा आरोपों को गलत साबित करने में सफल होती है, तो यह विवाद जल्द समाप्त हो सकता है। फिलहाल, यह मामला उद्योग, पर्यावरण और भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग नीति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है।