×

टुलसी गबार्ड का बयान: ईरान की न्यूक्लियर क्षमता पर नए सवाल

अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक टुलसी गबार्ड ने हाल ही में एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान की न्यूक्लियर एनरिचमेंट क्षमता 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के बाद पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के विपरीत है, जिन्होंने कहा था कि ईरान तेजी से अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम फिर से शुरू कर रहा है। इस पर सीनेट में सवाल उठाए गए हैं, और IAEA ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

टुलसी गबार्ड का बयान और ईरान की स्थिति

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक टुलसी गबार्ड ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस समिति को दी गई अपनी लिखित गवाही में कहा कि 2025 में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के परिणामस्वरूप ईरान की न्यूक्लियर एनरिचमेंट क्षमता पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद ईरान ने अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता को फिर से स्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया।

ट्रंप के दावों के विपरीत गबार्ड का बयान

गबार्ड का यह निष्कर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के विपरीत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान तेजी से अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम फिर से शुरू कर रहा है और कुछ ही हफ्तों में परमाणु हथियार हासिल कर सकता है। इसी दावे के आधार पर ट्रंप ने 'तत्काल न्यूक्लियर खतरे' का हवाला देते हुए युद्ध की शुरुआत की थी। सीनेट की सुनवाई के दौरान, डेमोक्रेट नेताओं ने गबार्ड से पूछा कि उन्होंने यह महत्वपूर्ण जानकारी मौखिक बयान में क्यों नहीं दोहराई। गबार्ड ने उत्तर दिया कि समय की कमी के कारण कुछ बातें नहीं कह पाईं।

IAEA का बयान

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख ने भी हाल ही में कहा है कि ईरान वर्तमान में परमाणु हथियार बनाने के किसी सक्रिय कार्यक्रम में नहीं है और वह जल्द ही बम बनाने की स्थिति में नहीं है।

युद्ध की वैधता पर सवाल

अब युद्ध को 20 दिन हो चुके हैं और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर महंगाई के रूप में दिखाई दे रहा है। अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट ने ईरान युद्ध की वैधता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब बहस इस बात पर है कि यह युद्ध वास्तविक खतरे के कारण था या यह एक रणनीतिक और राजनीतिक निर्णय था।