टो लाम बने वियतनाम के नए राष्ट्रपति, सामूहिक नेतृत्व की परंपरा का अंत
वियतनाम में नए राष्ट्रपति की शपथ
नई दिल्ली: टो लाम ने मंगलवार को वियतनाम के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। उन्हें देश की संसद द्वारा सर्वसम्मति से इस पद के लिए चुना गया है। टो लाम 2026 से 2031 तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे। उनके राष्ट्रपति बनने के साथ ही वियतनाम की दशकों पुरानी ‘सामूहिक नेतृत्व’ की परंपरा समाप्त हो गई है, क्योंकि अब देश के दोनों प्रमुख पद—कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख और राष्ट्रपति—एक ही व्यक्ति के पास हैं। इससे सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन वियतनाम को चीन जैसी राजनीतिक संरचना की ओर ले जा सकता है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी और आर्थिक सुधारों को गति मिलने की संभावना है, लेकिन इसके साथ ही अधिनायकवाद के बढ़ने का खतरा भी है। टो लाम, जो पहले सार्वजनिक सुरक्षा प्रमुख रह चुके हैं, अब अगले पांच वर्षों तक दोहरी सत्ता का संचालन करेंगे। जनवरी में उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में भी दूसरा कार्यकाल मिला था।
सिंगापुर स्थित ISEAS–यूसुफ इशहाक संस्थान के वरिष्ठ फेलो ले होंग हिएप के अनुसार, “सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है, हालांकि इससे नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में तेजी भी आ सकती है।” अमेरिका स्थित एशिया-पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज के अलेक्जेंडर वुविंग का मानना है कि दोनों पदों का एक ही व्यक्ति के पास होना वियतनाम की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत करेगा, जिससे ‘सामूहिक नेतृत्व’ जैसी पारंपरिक धारणाएं कमजोर होंगी।
विदेश नीति में सक्रिय भूमिका
टो लाम ने 2024 में पूर्व महासचिव Nguyễn Phú Trọng के निधन के बाद कुछ समय तक दोनों पदों की जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि, उन्होंने बाद में राज्य प्रमुख का पद छोड़ दिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे और विदेशी नेताओं से मुलाकातों में देश का प्रतिनिधित्व करते रहे।