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ट्रंप का ईरान को चेतावनी: होर्मुज जलडमरूमध्य पर शुल्क लगाने की संभावना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगा सकता है। ट्रंप ने कहा कि यह शुल्क क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने के लिए दी गई सेवाओं के बदले होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इस बीच, ईरान ने इजराइल के हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।
 

ईरान के खिलाफ अमेरिका की सख्त कार्रवाई


ट्रंप का बयान: ईरान नहीं, अमेरिका लगाएगा शुल्क


वॉशिंगटन में, अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हो रहा है। हाल ही में, ईरान ने इजराइल द्वारा लेबनान पर हमले के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का आदेश दिया, जिससे वहां फंसे जहाजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।


इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के साथ अंतिम समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगा सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह शुल्क क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने के लिए दी गई सेवाओं के बदले होगा।


60 दिनों तक शुल्क नहीं लगाने का आश्वासन

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत लागू 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई शुल्क नहीं होगा और समझौता पूरा होने तक शुल्क नहीं लगाया जाएगा।


यदि समझौता पूरा नहीं होता है, तो अमेरिका शुल्क लगाने का अधिकार सुरक्षित रखता है, जो मध्य पूर्व के देशों के लिए सुरक्षा प्रदान करने के लिए होगा।


ट्रंप की आलोचना का सामना

ट्रंप को ईरान के साथ हुए समझौते पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यह समझौता केवल 60 दिनों तक बिना शुल्क के आवाजाही की अनुमति देता है, और इसके बाद शुल्क लगाने की संभावना को खारिज नहीं करता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने इजराइल के हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है। ईरान का कहना है कि ये हमले अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन हैं।