ट्रंप का ईरान पर बयान: होर्मुज स्ट्रेट जल्द खुलेगा
ट्रंप का बयान
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि अमेरिकी प्रतिनिधि शनिवार को पाकिस्तान में ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्ग जल्द ही अपने आप खुल जाएगा, चाहे ईरान सहयोग करे या नहीं। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “यह अपने आप खुल जाएगा।”
जल्द खुलने की उम्मीद
उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि यह प्रक्रिया तेजी से होगी। और यदि ऐसा नहीं हुआ, तो हम इसे किसी न किसी तरीके से पूरा कर लेंगे।” रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच एक महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के दौरान ईरान ने इस जलमार्ग को बंद कर दिया था। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ किसी भी समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेहरान परमाणु हथियार न बना सके। उन्होंने कहा, “परमाणु हथियार नहीं होंगे। यही 99 प्रतिशत मुद्दा है।”
ईरान की स्थिति
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के पास वर्तमान में कोई मजबूत विकल्प नहीं है और वह केवल होर्मुज स्ट्रेट का उपयोग करके दुनिया पर थोड़े समय के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने शुक्रवार को कहा कि उसकी सेना पूरी तरह से सतर्क और तैयार है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल बार-बार अपने वादे तोड़ते रहे हैं, इसलिए वह सतर्क है।
सोशल मीडिया पर ट्रंप का बयान
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, “ईरानियों को शायद यह एहसास नहीं है कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का उपयोग करके दुनिया से थोड़े समय के लिए ज़बरदस्ती वसूली करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “आज वे सिर्फ इसलिए ज़िंदा हैं ताकि बातचीत कर सकें!”
संभावित परिणाम
इससे पहले, ट्रंप ने 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए एक फ़ोन इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ बातचीत के परिणाम “लगभग 24 घंटों में” स्पष्ट हो जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान में शांति वार्ता विफल होती है, तो ईरान पर फिर से हमले शुरू करने के लिए अमेरिकी युद्धपोतों को फिर से हथियारों से लैस किया जा रहा है।
युद्ध का हाल
इस संघर्ष में अमेरिका, ईरान और इजरायल तीनों ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में जो युद्धविराम हुआ है, वह बहुत कमजोर है और दोनों पक्षों के बीच पुराने मतभेदों के कारण स्थायी शांति समझौता करना आसान नहीं होगा।