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ट्रंप का बयान: ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्ति की ओर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह युद्ध लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता में कमी और मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे झूठे समाचारों का उल्लेख किया। ट्रंप ने ईरान के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी चिंता जताई। इस लेख में ट्रंप के बयान के प्रमुख बिंदुओं और ईरान की स्थिति पर चर्चा की गई है।
 

ईरान की सैन्य क्षमता में कमी


ट्रंप का बड़ा बयान


वॉशिंगटन से आई खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध लगभग समाप्त हो चुका है और ईरान की सैन्य ताकत काफी हद तक कमजोर हो गई है। ट्रंप ने ईरान पर मीडिया में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान भले ही सैन्य रूप से कमजोर है, लेकिन वह झूठी खबरें फैलाने में माहिर है, खासकर फेक न्यूज मीडिया के माध्यम से।


ट्रंप ने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब ईरान का एक नया हथियार बन गया है, जिसका उपयोग वह अपनी कमजोर स्थिति को छुपाने और अपनी शक्ति का झूठा प्रदर्शन करने के लिए कर रहा है।


झूठी जानकारी का खुलासा

ट्रंप ने कहा कि ईरान द्वारा प्रदर्शित कामिकाजी बोट्स, जो समुद्र में जहाजों पर हमले करती हैं, वास्तव में मौजूद नहीं हैं। यह सब झूठी जानकारी है, जिसका उद्देश्य यह दिखाना है कि उनका सैन्य बल कितना मजबूत है, जबकि वास्तविकता यह है कि वे लगातार हार का सामना कर रहे हैं।


उन्होंने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्टिंग की आलोचना की, जिसमें दावा किया गया था कि पांच अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमानों को मार गिराया गया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ये सभी विमान सेवा में हैं, सिवाय एक के, जो जल्द ही उड़ान भरने लगेगा।


हॉर्मुज की सुरक्षा पर जोर

ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि हॉर्मुज की सुरक्षा अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन फिर भी वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। उन्होंने अन्य देशों को भी इसमें सहयोग देने के लिए प्रेरित किया।


ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का उदाहरण देते हुए, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दो विमान वाहक जहाजों को हॉर्मुज की ओर भेजने में हिचकिचाहट दिखाई थी, जबकि अमेरिका पहले ही स्थिति को नियंत्रित कर चुका था।


ट्रंप ने यह भी कहा कि चाहे समर्थन मिले या न मिले, अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएगा।