ट्रंप का बयान: ईरान परमाणु समझौते के लिए इच्छुक, विफलता पर हमले की चेतावनी
ईरान के साथ समझौते की संभावनाएँ
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान वॉशिंगटन के साथ समझौता करने के लिए "बेहद इच्छुक" है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने यह मान लिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं रख सकता। हालांकि, ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है, तो अमेरिकी सेनाएं फिर से हमले शुरू कर सकती हैं।
ट्रंप ने यह जानकारी रिपब्लिकन कांग्रेसमैन एंडी ओगल्स के लिए एक वर्चुअल कैंपेन रैली और फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में साझा की।
उन्होंने टेनेसी में वोटर्स से कहा, "ईरान के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे और वे इसे समझते हैं। हमने उन पर बहुत दबाव डाला है और वे किसी भी तरह से डील करना चाहते हैं।"
फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कुछ सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने ईरान के उन बयानों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि न्यूक्लियर मामलों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
ट्रंप ने कहा, "कभी-कभी ऐसा होता है कि हम किसी अच्छी चर्चा के बीच होते हैं और वे बाहर आकर कहते हैं कि हम बात नहीं कर रहे हैं, जबकि हम केवल उसी पर चर्चा कर रहे हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान वास्तव में अमेरिका की मांग मान चुका है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।
राष्ट्रपति ने कहा, "मैं चाहता हूं कि उनके पास परमाणु हथियार न हों। वे इस बात के लिए मान गए हैं, हमें बस इसे आधिकारिक बनाना है।"
ट्रंप ने समझौते को प्राथमिकता दी, लेकिन चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने समझौता करने से इनकार किया, तो वे ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमले करेंगे।
उन्होंने कहा, "अगर वे समझौता नहीं करते हैं, तो मैं वापस जाऊंगा और अपना काम पूरा करूंगा।"
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका 'पिकएक्स माउंटेन' पर हमला कर सकता है, जहां ईरान निर्माण कर रहा है।
उन्होंने कहा, "हमने उनके परमाणु ठिकानों को नष्ट कर दिया था और यदि समझौता नहीं हुआ, तो हमें 'पिकएक्स' को भी नष्ट करना होगा।"
ट्रंप ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है और केवल चुनिंदा जहाजों को गुजरने दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "हमारी नाकेबंदी इतनी मजबूत है कि कोई भी इससे गुजर नहीं सकता।"
गौरतलब है कि ईरान और छह बड़ी ताकतों के बीच 2015 में एक परमाणु समझौता हुआ था, जिसके तहत तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाई गई थी। ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को उस समझौते से अलग कर लिया था।