ट्रंप का बयान: ग्रीनलैंड पर अमेरिका का अधिकार सुनिश्चित करना है
अमेरिका का ग्रीनलैंड पर अधिकार
वाशिंगटन - अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने अधिकार में लेने की योजना बना रहा है। उनका मानना है कि यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता है, तो रूस या चीन इस महत्वपूर्ण क्षेत्र पर कब्जा कर सकते हैं।
एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, "अगर हम ग्रीनलैंड नहीं लेंगे, तो रूस या चीन इसे ले लेंगे, और मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।" उन्होंने यह भी कहा कि वे बातचीत के माध्यम से समझौता करना चाहेंगे, लेकिन उनका मानना है कि ग्रीनलैंड का अमेरिका के पास आना निश्चित है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें सौदा करना पसंद है क्योंकि यह आसान है, लेकिन किसी भी स्थिति में ग्रीनलैंड अमेरिका का होगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इसके लिए सैन्य कार्रवाई की जाएगी, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका का ध्यान केवल ग्रीनलैंड को अपने अधिकार में लेने पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बात लीज पर लेने या अस्थायी रूप से रखने की नहीं है, बल्कि पूर्ण स्वामित्व की है। ट्रंप ने यह भी कहा कि इससे नाटो को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि नाटो को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और अब उसके सदस्य देश अपने सकल घरेलू उत्पाद का पांच प्रतिशत तक खर्च कर रहे हैं।
ग्रीनलैंड की सुरक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां की सुरक्षा बहुत कमजोर है। उन्होंने बताया कि वहां लगभग कोई रक्षा नहीं है, जबकि आसपास रूसी और चीनी युद्धपोत और पनडुब्बियां मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, "आपको मालिकाना हक चाहिए। आपको सच में टाइटल चाहिए, जैसा कि रियल एस्टेट बिजनेस में कहते हैं।" जब उनसे पूछा गया कि क्या डेनमार्क को ग्रीनलैंड के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव दिया गया है, तो ट्रंप ने कहा कि अभी ऐसा नहीं किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड को इस समझौते के लिए तैयार होना चाहिए। ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर उभरते शिपिंग रूट और सैन्य कॉरिडोर के निकट होने के कारण।
अमेरिका की वहां पहले से ही सैन्य मौजूदगी है। आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों के कारण इस इलाके की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।