ट्रंप की नई नीति: अवैध प्रवासी ट्रक चालकों की जगह पूर्व सैनिकों को रोजगार
अमेरिकी ट्रकिंग उद्योग में बड़ा बदलाव
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासी ट्रक चालकों को हटाने और उनकी जगह पूर्व सैनिकों को रोजगार देने के लिए 'फ्रीडम हॉलर्स' नामक एक नई राष्ट्रीय नीति की घोषणा की है। यह घोषणा परिवहन मंत्री सीन डफी की उपस्थिति में की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और पूर्व सैनिकों को उच्च वेतन वाली सुरक्षित नौकरियां प्रदान करना है।
सीधे लाइसेंस और कड़े नियम
इस नई नीति के तहत, सेवानिवृत्त सैनिकों को बिना किसी जटिल परीक्षा के सीधे कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) दिया जाएगा, बशर्ते कि उन्होंने अमेरिकी सेना में भारी वाहन चलाने का अनुभव प्राप्त किया हो। ट्रंप प्रशासन के कड़े नियमों के तहत, अब तक 28,000 से अधिक गैर-नागरिक और अवैध प्रवासियों के ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। इसके अलावा, अंग्रेजी भाषा में दक्षता से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करते हुए 24,000 से अधिक अन्य चालकों के लाइसेंस भी निरस्त किए गए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कड़े रुख के कारण भविष्य में लगभग दो लाख प्रवासी ट्रक चालकों को इस उद्योग से बाहर होना पड़ सकता है।
भारतीय ड्राइवरों की चिंता
अमेरिकी ट्रकिंग उद्योग में लगभग 1.3 लाख से 1.5 लाख भारतीय मूल के ड्राइवर कार्यरत हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या पंजाब और हरियाणा से आए प्रवासियों की है। हालांकि कई भारतीय कानूनी दस्तावेजों के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन ट्रकिंग व्यवसायों पर बढ़ती निगरानी, सख्त अंग्रेजी टेस्ट और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के कारण वैध ड्राइवरों के लिए भी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
रेमिटेंस पर प्रभाव
यदि प्रवासियों के रोजगार छिनते हैं, तो इसका सीधा असर भारत, विशेषकर पंजाब में उनके परिवारों को भेजी जाने वाली विदेशी कमाई पर पड़ेगा, जिससे वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ट्रंप की इस नई नीति ने जहां अमेरिकी पूर्व सैनिकों के बीच उत्साह पैदा किया है, वहीं अमेरिकी माल ढुलाई क्षेत्र पर निर्भर भारतीय समुदाय अब आने वाले संकट को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहा है।