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ट्रंप प्रशासन का नया डिपोर्टेशन अभियान: 18,000 भारतीयों पर खतरा

ट्रंप प्रशासन ने अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लगभग 18,000 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट करने की योजना बनाई है। इस नए अभियान के तहत, इमिग्रेशन कस्टम्स एंड एनफोर्समेंट (ICE) की टीमें लगातार छापे मार रही हैं। पकड़े गए प्रवासियों को अदालत में अपील करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है और उन्हें सीधे डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है। जानें इस अभियान के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

ट्रंप प्रशासन की नई कार्रवाई


ट्रंप प्रशासन ने अवैध रूप से अमेरिका में निवास कर रहे लगभग 18,000 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट करने की योजना बनाई है। इस नए अभियान के तहत, अमेरिकी इमिग्रेशन कस्टम्स एंड एनफोर्समेंट (ICE) की टीमें लगातार छापे मार रही हैं। इस बार पकड़े गए प्रवासियों को अदालत में अपील करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।


उन्हें अपनी बात रखने की अनुमति नहीं है, और यहां तक कि वकील की सहायता भी नहीं मिल रही है। पकड़े गए व्यक्तियों को सीधे डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है, जहां उनके साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आई हैं।


सैन्य विमानों का उपयोग

इस बार ट्रंप प्रशासन डिपोर्टेशन के लिए सैन्य विमानों का उपयोग करने की योजना बना रहा है, जो उनकी सख्त इमिग्रेशन नीति का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है। प्रशासन ने एल पासो और कैलिफोर्निया में दो नए वेयरहाउस खरीदे हैं, जिन पर लगभग 16,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन वेयरहाउस को डिटेंशन सेंटर में परिवर्तित कर दिया गया है, जहां लगभग 12,000 प्रवासियों को रखा जा रहा है।


पिछले डिपोर्टेशन आंकड़े

2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया था, जैसा कि भारत के विदेश मंत्रालय ने जून 2026 में बताया। इसी वर्ष, जून तक 1,076 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 5 फरवरी, 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था, जिसमें कई लोगों को हथकड़ी और बेड़ियों में देखा गया।


ICE की कार्रवाई

न्यूयॉर्क के इमिग्रेशन अटॉर्नी ग्रेग सिस्किंड ने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से प्रवासियों के मामलों की पैरवी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को पहले अपना पक्ष रखने का मौका मिलता था, लेकिन अब ICE के छापों के बाद उन्हें सीधे डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है। अमेरिका में संघीय व्यवस्था के कारण हर राज्य में मानवाधिकारों से जुड़े अलग-अलग कानून हैं, लेकिन ICE सभी राज्यों में कार्रवाई कर रही है।