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ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर कब्जे का नया आदेश: क्या है इसके पीछे की रणनीति?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए योजना बनाने का आदेश दिया है, जो नाटो और अमेरिका के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है। सैन्य अधिकारी इस विचार से असहमत हैं और इसे कानूनी दृष्टि से गलत मानते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रम्प की यह रुचि घरेलू राजनीति से जुड़ी हो सकती है। जानें इस योजना के पीछे की रणनीति और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 

ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर कब्जे का आदेश


डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड को दी गई जिम्मेदारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए योजना बनाने का आदेश दिया है। डेली मेल के अनुसार, ट्रम्प ने इस कार्य के लिए जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड को जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, सैन्य अधिकारी इस विचार से असहमत हैं और इसे कानूनी दृष्टि से गलत मानते हैं। एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि जनरलों का मानना है कि ट्रम्प की ग्रीनलैंड योजना बेतुकी और गैरकानूनी है।


उनका कहना है कि राष्ट्रपति की जिद एक छोटे बच्चे से निपटने के समान है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रम्प की यह रुचि घरेलू राजनीति से भी जुड़ी हो सकती है। इस साल के अंत में मिड-टर्म चुनाव होने वाले हैं, और रिपब्लिकन संसद पर नियंत्रण खोने से चिंतित हैं। इसलिए, ट्रम्प किसी बड़े कदम के जरिए लोगों का ध्यान अर्थव्यवस्था की समस्याओं से हटाना चाहते हैं।


नाटो के लिए गंभीर संकट

यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है, तो यह नाटो के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप यूरोपीय नेताओं के साथ सीधा टकराव हो सकता है, जिससे नाटो गठबंधन टूटने के कगार पर पहुंच सकता है। कुछ यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि ट्रम्प के कट्टरपंथी गुट का असली उद्देश्य नाटो को अंदर से कमजोर करना है, क्योंकि संसद उन्हें नाटो से बाहर निकलने की अनुमति नहीं देगी। इसलिए, ग्रीनलैंड पर कब्जा करके यूरोपीय देशों को नाटो छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है।


रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि ट्रम्प नाटो को खत्म करना चाहते हैं, तो यह शायद सबसे सरल तरीका हो सकता है।


ट्रम्प का नाटो के प्रति दृष्टिकोण

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प लंबे समय से नाटो को अनुचित मानते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका इसमें सबसे अधिक धन और संसाधन खर्च करता है, जबकि यूरोपीय देश अपने जीडीपी का 2% रक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा नहीं करते। पहले कार्यकाल में, उन्होंने नाटो सहयोगियों से भुगतान बढ़ाने की मांग की और कहा कि यदि वे ऐसा नहीं करेंगे, तो अमेरिका उनकी रक्षा नहीं करेगा। 2024 के चुनाव अभियान में, ट्रम्प ने कहा कि वे रूस को उन नाटो सदस्यों पर जो चाहे करने की अनुमति देंगे जो पर्याप्त खर्च नहीं करते।


अमेरिका फर्स्ट नीति का समर्थन

ट्रम्प का उद्देश्य अमेरिका फर्स्ट नीति को बढ़ावा देना है, जिसमें वे अमेरिकी करदाताओं के पैसे को विदेशी सुरक्षा पर कम खर्च करना चाहते हैं। इसके साथ ही, वे यूरोप को अपनी रक्षा स्वयं करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।


विश्लेषकों की राय

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प नाटो को कमजोर करके रूस के साथ बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। ट्रम्प के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा था कि वे नाटो से अमेरिका को निकालने की कोशिश करेंगे। वे इसे पुराना और अमेरिका के लिए बोझ मानते हैं। हालांकि, कई विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इससे अमेरिका अलग-थलग पड़ सकता है, यूरोप रूस के प्रभाव में आ सकता है और वैश्विक सुरक्षा कमजोर हो सकती है।