ट्विशा शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: CBI जांच की आवश्यकता पर जोर
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में उठे गंभीर सवाल
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संज्ञान लिया और सोमवार को सुनवाई के दौरान स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और मुख्य आरोपी के प्रभावशाली व्यवहार पर कई तीखे सवाल उठाए।
सीबीआई जांच की आवश्यकता
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गहराई में जाने और सच्चाई को उजागर करने के लिए सीबीआई द्वारा जांच आवश्यक है। इसके साथ ही, कोर्ट ने दोनों पक्षों को मीडिया ट्रायल समाप्त करने की सख्त हिदायत दी है।
स्थानीय जांच की निष्पक्षता पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि आरोपी गिरिबाला सिंह के रिटायर्ड जज होने के कारण यह धारणा बन रही है कि स्थानीय पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि इस माहौल में मामले की सच्चाई कैसे सामने आएगी?
सीबीआई को जांच सौंपने का निर्णय
इस आशंका को दूर करने के लिए मामले की जांच को तुरंत सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्रीय एजेंसी आज से ही केस डायरी और अन्य दस्तावेज अपने हाथ में लेगी ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
जल्दी जमानत मिलने पर सवाल
पीठ ने हैरानी जताई कि इस गंभीर मामले में आरोपी को इतनी जल्दी जमानत कैसे मिल गई। साथ ही, जांच की प्रगति पर भी सवाल उठाए। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि आरोपी गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और आधिकारिक पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं।
गोपनीय जानकारियों का लीक होना
कोर्ट ने गंभीरता से लिया कि मामले की संवेदनशीलता के बावजूद दोनों पक्षों द्वारा सार्वजनिक मंचों पर बयान दिए जा रहे हैं। ट्विशा के वकील ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष मीडिया में कॉल डिटेल्स जैसी गोपनीय जानकारियां साझा कर रहा है।
ट्विशा को बदनाम करने की कोशिश
दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस पर चीफ जस्टिस ने सख्त निर्देश दिए कि दोनों पक्ष मीडिया ट्रायल तुरंत बंद करें और अपनी शिकायतें सीधे सीबीआई के पास दर्ज कराएं।
समाज के प्रति अदालत का दृष्टिकोण
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एक युवा बेटी को खोने पर परिवार को जो पीड़ा होती है, उसके प्रति अदालत की पूरी सहानुभूति है। सॉलिसिटर जनरल ने माता-पिता को सलाह दी कि उन्हें अपनी बेटियों के हक के लिए खड़ा होना चाहिए।
बेटियों के लिए सही निर्णय
सामाजिक दबाव के कारण बेटियों को ससुराल में प्रताड़ना सहने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। एक मृत बेटी होने से बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा होकर अपने मायके में सुरक्षित रहे।
मुकदमे को मध्य प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करने की संभावना
ट्विशा शर्मा के परिवार ने आशंका जताई कि राज्य में रसूखदारों के प्रभाव के कारण सुनवाई प्रभावित हो सकती है। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है और पीड़ित परिवार को निष्पक्ष कानूनी लड़ाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर याचिका दायर करने का अधिकार है।