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डाबर इंडिया किसानों को औषधीय पौधे उपलब्ध कराने के लिए सहमत

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने डाबर इंडिया के साथ औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिला किसानों को भी शामिल करने का लक्ष्य रखती है। जानें इस योजना के तहत कौन-कौन से पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे और इसका किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एमओए पर हस्ताक्षर


हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को 'साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बनडाईऑक्साइड एमीशनसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश' शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर, डाबर इंडिया लिमिटेड और करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए।


निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पौधों की उपलब्धता

पहले एमओए के तहत, डाबर इंडिया लिमिटेड हर साल किसानों को 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराएगी। यह पौधे निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए होंगे, जिनमें आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं। ये पौधे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर जिलों और निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएंगे।


मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पौधों की योजना

मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला, पदम काष्ठ और पुष्करमूल के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा, अल्पाइन प्रजातियाँ जैसे अतीस और विष किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएंगी।


महिला किसानों की भागीदारी

दूसरा एमओए करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों के लिए हस्ताक्षरित किया गया है। इसके अंतर्गत सोलन जिले में औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस समझौते में छह प्राथमिकता वाली प्रजातियाँ शामिल हैं, जिनमें हल्दी, अश्वगंधा, शतावरी, तुलसी, चिरायता और हिमालयन जेंटियन शामिल हैं। प्रारंभिक चरण में 225 महिला किसानों को 108 बीघा से अधिक भूमि पर शामिल किया जाएगा।